2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए भारत को ECB का समर्थन, अहमदाबाद 2030 को रिचर्ड गोल्ड ने बताया बड़ी तैयारी

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भारत की 2036 ओलंपिक मेजबानी की दावेदारी को इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड यानी ECB का समर्थन मिला है। ECB के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिचर्ड गोल्ड ने भारत और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की कोशिशों की तारीफ करते हुए कहा कि 2030 में अहमदाबाद में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स भारत के लिए 2036 ओलंपिक की तैयारी का शानदार मौका साबित हो सकते हैं। उनके बयान को भारत की ओलंपिक दावेदारी के लिए अंतरराष्ट्रीय खेल जगत से मिले महत्वपूर्ण समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है।

समर्थन

रिचर्ड गोल्ड ने भारत की ओलंपिक मेजबानी की महत्वाकांक्षा का समर्थन करते हुए कहा कि ECB इस प्रयास में भारत और BCCI के साथ खड़ा है। उन्होंने क्रिकेट को ओलंपिक में वापस लाने के लिए ICC चेयरमैन जय शाह और क्रिकेट प्रशासन से जुड़े लोगों के प्रयासों की भी सराहना की। भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता और देश की खेल आयोजन क्षमता को देखते हुए गोल्ड का मानना है कि 2036 ओलंपिक की मेजबानी का दावा भारत के लिए एक स्वाभाविक अगला कदम हो सकता है।

अहमदाबाद

भारत की 2036 ओलंपिक योजना में 2030 अहमदाबाद कॉमनवेल्थ गेम्स को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इतना बड़ा बहु-खेल आयोजन भारत को अपनी आयोजन क्षमता को बड़े स्तर पर परखने का मौका देगा। स्टेडियम, खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं, परिवहन, सुरक्षा, तकनीकी व्यवस्था और आयोजन प्रबंधन जैसे कई क्षेत्रों में भारत को अपनी तैयारियों का प्रदर्शन करना होगा। इसे ओलंपिक से पहले होने वाली एक बड़ी ड्रेस रिहर्सल के तौर पर भी देखा जा सकता है।

परीक्षा

2030 कॉमनवेल्थ गेम्स के सफल आयोजन से भारत को 2036 ओलंपिक की दावेदारी के लिए ठोस उदाहरण पेश करने का मौका मिलेगा। अगर अहमदाबाद और उससे जुड़े आयोजन स्थलों पर प्रतियोगिताएं बिना किसी बड़ी परेशानी के आयोजित होती हैं, तो इससे भारत की अंतरराष्ट्रीय आयोजनों को संभालने की क्षमता पर भरोसा बढ़ सकता है। वहीं किसी भी बड़ी कमी से भारत की तैयारियों पर सवाल भी उठ सकते हैं। इसलिए 2030 का आयोजन सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भविष्य की ओलंपिक दावेदारी की बड़ी परीक्षा भी होगा।

क्रिकेट

क्रिकेट की 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में वापसी ने इस खेल के वैश्विक विस्तार को नई दिशा दी है। क्रिकेट को ओलंपिक कार्यक्रम में शामिल किए जाने से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इस खेल की पहुंच बढ़ने की उम्मीद है। भारत में क्रिकेट की जबरदस्त लोकप्रियता को देखते हुए ओलंपिक में क्रिकेट की मौजूदगी देश के खेल और व्यावसायिक दोनों प्रभाव को बढ़ा सकती है। ECB का मानना है कि ओलंपिक क्रिकेट के लिए नए दर्शकों और नए बाजारों तक पहुंचने का बड़ा मंच बन सकता है।

दिव्यांग क्रिकेट

रिचर्ड गोल्ड ने मिक्स्ड डिसेबिलिटी क्रिकेट को लेकर भी अपनी उम्मीदें जाहिर कीं। इस प्रारूप में अलग-अलग प्रकार की दिव्यांगता वाले खिलाड़ी एक साथ टीम बनाकर मुकाबला करते हैं। भारत और इंग्लैंड के बीच इस समय सात मैचों की सीरीज भी खेली जा रही है, जिससे इस प्रारूप को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। गोल्ड के अनुसार इसकी अवधारणा करीब तीन से चार साल पहले ECB से जुड़े इयान मार्टिन के विचार से सामने आई थी, जिसका उद्देश्य अलग-अलग दिव्यांगताओं वाले खिलाड़ियों को एक साझा टीम खेल में बराबरी से प्रतिस्पर्धा करने का अवसर देना था।

बड़ा मंच

गोल्ड को उम्मीद है कि मिक्स्ड डिसेबिलिटी क्रिकेट आने वाले समय में कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और पैरालंपिक जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंच सकता है। भारत, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए मुकाबलों ने इस प्रारूप को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अगर इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार समर्थन मिलता है, तो यह दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए क्रिकेट में नए अवसर पैदा कर सकता है। गोल्ड का मानना है कि ICC चेयरमैन जय शाह इस प्रारूप को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

IOC प्रक्रिया

भारत की 2036 ओलंपिक मेजबानी की दावेदारी पर फैसला तुरंत नहीं होने वाला है। IOC की मौजूदा प्रक्रिया के तहत संभावित मेजबान देशों का मूल्यांकन Future Host Commission करेगा। इसके बाद Targeted Dialogue चरण के जरिए उम्मीदवारों की योजनाओं और तैयारियों का आकलन किया जाएगा। आयोग अपनी सिफारिश IOC Session के सामने रखेगा, जबकि IOC Executive Board पसंदीदा उम्मीदवारों पर विचार करने के बाद अंतिम नामों को IOC Session में मतदान के लिए भेजेगा। मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार अंतिम फैसला 2029 के मध्य के आसपास होने की उम्मीद है।

चुनौती

ECB का समर्थन भारत की दावेदारी के लिए सकारात्मक संकेत जरूर है, लेकिन सिर्फ अंतरराष्ट्रीय समर्थन के आधार पर ओलंपिक की मेजबानी हासिल नहीं की जा सकती। भारत को बुनियादी ढांचे, परिवहन, सुरक्षा, खिलाड़ियों की सुविधाओं, आयोजन क्षमता और लंबे समय की योजना को लेकर मजबूत प्रस्ताव पेश करना होगा। अलग-अलग खेलों के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं तैयार करना और उन्हें समय पर संचालित करना भी बड़ी चुनौती होगी।

भविष्य

भारत के लिए 2030 अहमदाबाद कॉमनवेल्थ गेम्स इस पूरी योजना का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव बन सकते हैं। यदि भारत इस आयोजन के जरिए अपनी क्षमता और तैयारी का मजबूत उदाहरण पेश करता है, तो 2036 ओलंपिक की दावेदारी को काफी मजबूती मिल सकती है। इसके साथ क्रिकेट की ओलंपिक में वापसी और मिक्स्ड डिसेबिलिटी क्रिकेट जैसे नए प्रारूपों का बढ़ता प्रभाव भारत की खेल कूटनीति को भी नई दिशा दे सकता है।

2036 ओलंपिक की मेजबानी भारत के लिए सिर्फ एक खेल आयोजन हासिल करने की कोशिश नहीं है, बल्कि देश को वैश्विक खेल केंद्र के रूप में स्थापित करने की बड़ी महत्वाकांक्षा भी है। ECB प्रमुख रिचर्ड गोल्ड का समर्थन इस दावेदारी के लिए एक सकारात्मक संकेत जरूर है, लेकिन असली परीक्षा भारत की अपनी तैयारियों की होगी।

2030 अहमदाबाद कॉमनवेल्थ गेम्स अगर सफल रहते हैं, तो भारत के पास 2036 ओलंपिक के लिए अपनी क्षमता साबित करने का मजबूत आधार होगा। अब आने वाले वर्षों में भारत की तैयारियों और IOC की प्रक्रिया पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

FAQs

भारत किस ओलंपिक की मेजबानी चाहता है?

भारत 2036 ओलंपिक की मेजबानी करना चाहता है।

भारत की ओलंपिक बोली का समर्थन किसने किया?

ECB प्रमुख रिचर्ड गोल्ड ने इसका समर्थन किया।

2030 कॉमनवेल्थ गेम्स कहां होंगे?

क्रिकेट ओलंपिक में कब लौटेगा?

क्रिकेट 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में लौटेगा।

2036 ओलंपिक मेजबान का फैसला कब होगा?

अंतिम फैसला 2029 के मध्य में होने की उम्मीद है।

Ehtesham Arif

I’m Ehtesham Arif, lead cricket analyst at Kricket Wala with over 3 years of experience in cricket journalism. I’m passionate about bringing you reliable match analysis and the latest updates from the world of cricket. My favorite team is India, and in the IPL, I support Delhi Capitals.

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