वैभव सूर्यवंशी के टेस्ट करियर पर राहुल द्रविड़ की सलाह, बोले- अभी धैर्य रखना जरूरी

Published On:
Vaibhav Sooryavanshi

वैभव सूर्यवंशी ने बेहद कम उम्र में क्रिकेट की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना ली है। आईपीएल में धमाकेदार बल्लेबाजी के बाद उन्होंने सिर्फ 15 साल की उम्र में भारत के लिए टी20 इंटरनेशनल डेब्यू भी कर लिया। इतनी कम उम्र में मिली सफलता के बाद अब उनके टेस्ट करियर को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, पूर्व भारतीय कोच राहुल द्रविड़ का मानना है कि वैभव को टेस्ट क्रिकेट के लिए जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। उनके मुताबिक, इस युवा बल्लेबाज के लिए अभी सबसे जरूरी है कि वह ज्यादा से ज्यादा रेड-बॉल क्रिकेट खेले और धीरे-धीरे इस फॉर्मेट की जरूरतों को समझे।

संतुलन

वैभव ने आईपीएल और टी20 क्रिकेट में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से काफी प्रभावित किया है। छोटे फॉर्मेट में वह गेंदबाजों पर शुरुआत से ही दबाव बनाने और तेजी से रन बनाने की क्षमता रखते हैं। लेकिन टेस्ट क्रिकेट की चुनौती बिल्कुल अलग होती है।

यहां बल्लेबाज को सिर्फ रन बनाने की क्षमता नहीं, बल्कि लंबे समय तक एकाग्रता बनाए रखने, गेंद छोड़ने, डिफेंस करने और बदलती परिस्थितियों के हिसाब से बल्लेबाजी करने की जरूरत होती है। द्रविड़ का मानना है कि वैभव के लिए सफेद और लाल गेंद वाले क्रिकेट के बीच सही संतुलन बनाना बेहद जरूरी है। आईपीएल उन्हें टी20 का अनुभव दे रहा है, जबकि घरेलू क्रिकेट उन्हें टेस्ट क्रिकेट के लिए जरूरी आधार तैयार करने का मौका दे सकता है।

अनुभव

वैभव की प्रथम श्रेणी क्रिकेट यात्रा अभी शुरुआती दौर में है। उन्होंने रणजी ट्रॉफी प्लेट लीग में तीन अलग-अलग मौकों पर खेलते हुए 12 पारियों में 17.25 की औसत से रन बनाए हैं। हालांकि, इन आंकड़ों को देखकर उनके भविष्य का फैसला करना सही नहीं होगा। भारत की अंडर-19 टीम की व्यस्तताओं के कारण उन्हें लगातार घरेलू रेड-बॉल क्रिकेट खेलने का मौका भी नहीं मिला है।

यही वजह है कि द्रविड़ उनके प्रदर्शन को एक लंबी प्रक्रिया के तौर पर देखने की सलाह दे रहे हैं। वैभव को नियमित रूप से प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलने का मौका मिलेगा तो उनके खेल के कई पहलू धीरे-धीरे बेहतर हो सकते हैं और उन्हें टेस्ट क्रिकेट की वास्तविक चुनौती को समझने का पर्याप्त अनुभव भी मिलेगा।

दलीप

वैभव के लिए दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन के साथ खेलना काफी महत्वपूर्ण हो सकता है। इस टूर्नामेंट में उन्हें मजबूत घरेलू खिलाड़ियों के खिलाफ लंबे समय तक बल्लेबाजी करने का मौका मिलेगा। यहां सिर्फ रन बनाना ही उनकी परीक्षा नहीं होगी, बल्कि उन्हें अपनी डिफेंस तकनीक, शॉट चयन, एकाग्रता और लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहने की क्षमता पर भी काम करना होगा। रेड-बॉल क्रिकेट में जितनी ज्यादा गेंदें खेलने का अनुभव वैभव को मिलेगा, उतना ही उन्हें यह समझने में मदद मिलेगी कि टेस्ट क्रिकेट में किस समय आक्रमण करना है और किस समय धैर्य के साथ बल्लेबाजी करनी है।

धैर्य

वैभव की उम्र को देखते हुए राहुल द्रविड़ की सबसे महत्वपूर्ण सलाह धैर्य रखने की है। सिर्फ 15 साल की उम्र में आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुंचना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इससे करियर पर उम्मीदों का दबाव भी बढ़ सकता है। हर युवा खिलाड़ी के करियर में अच्छा और खराब दौर आता है। वैभव के साथ भी ऐसा होगा।

कुछ पारियों में वह शानदार प्रदर्शन करेंगे, जबकि कुछ मुकाबलों में उन्हें असफलता का सामना करना पड़ेगा। द्रविड़ का संदेश यही है कि शुरुआती सफलता को देखकर वैभव पर तुरंत टेस्ट क्रिकेट में पहुंचने का दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्हें अपना खेल विकसित करने और अपनी कमियों पर काम करने के लिए पर्याप्त समय मिलना जरूरी है।

टेस्ट

टेस्ट क्रिकेट में जगह बनाना किसी तेज रफ्तार दौड़ की तरह नहीं है। यह एक लंबी पारी की तरह है, जिसमें खिलाड़ी को लगातार अपने खेल में सुधार करना पड़ता है। वैभव के पास अभी उम्र और समय दोनों हैं। अगर वह अगले कुछ वर्षों में नियमित रूप से रेड-बॉल क्रिकेट खेलते हैं, तो उनकी तकनीक और मानसिक मजबूती दोनों बेहतर हो सकती हैं।

टेस्ट क्रिकेट में एक बल्लेबाज को लंबे स्पेल खेलने वाले गेंदबाजों का सामना करना पड़ता है और कई बार एक ही तरह की गेंदों को घंटों तक धैर्य के साथ खेलना पड़ता है। द्रविड़ के मुताबिक, क्रिकेट को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे खिलाड़ियों की जरूरत है जो अलग-अलग फॉर्मेट में खुद को ढाल सकें। वैभव में यह क्षमता हो सकती है, लेकिन उसे साबित करने के लिए उन्हें लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा।

भविष्य

वैभव के लिए आईपीएल में मिली शुरुआती सफलता निश्चित रूप से शानदार है। टी20 इंटरनेशनल में भारत के लिए खेलने का मौका भी उनके करियर में बड़ा पड़ाव है। लेकिन टेस्ट क्रिकेट को लेकर फिलहाल सबसे सही रास्ता यही दिखाई देता है कि वह घरेलू रेड-बॉल क्रिकेट पर ज्यादा ध्यान दें। दलीप ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट उनके लिए अपनी तकनीक को परखने और लंबे प्रारूप की आदत डालने का अच्छा मौका हैं। अगर वैभव लगातार प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलते हैं और वहां अपनी बल्लेबाजी को मजबूत करते हैं, तो भविष्य में टेस्ट टीम का दरवाजा उनके लिए अपने आप खुल सकता है।

वैभव सूर्यवंशी के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती टेस्ट टीम में जगह बनाना नहीं, बल्कि खुद को एक पूर्ण क्रिकेटर के रूप में विकसित करना है। राहुल द्रविड़ की सलाह भी इसी दिशा में है। कम उम्र में मिली सफलता के बावजूद उन्हें जल्दबाजी करने के बजाय ज्यादा रेड-बॉल क्रिकेट खेलना होगा और टेस्ट की मुश्किल परिस्थितियों के लिए खुद को तैयार करना होगा। अगर वैभव इस प्रक्रिया में धैर्य बनाए रखते हैं, तो आने वाले वर्षों में उनके पास भारत के लिए तीनों फॉर्मेट में खेलने का मजबूत मौका हो सकता है। अभी उनके लिए सबसे जरूरी चीज रिकॉर्ड या चयन नहीं, बल्कि सही तरीके से विकास करना है।

FAQs

वैभव सूर्यवंशी की उम्र कितनी है?

वैभव सूर्यवंशी 15 साल के हैं।

द्रविड़ ने वैभव को क्या सलाह दी?

द्रविड़ ने उन्हें समय और ज्यादा रेड-बॉल क्रिकेट खेलने की सलाह दी।

वैभव ने टी20 डेब्यू कब किया?

उन्होंने जून में इंग्लैंड के खिलाफ टी20I डेब्यू किया।

वैभव दलीप ट्रॉफी में किस जोन से खेलेंगे?

वैभव दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन से खेलेंगे।

वैभव का प्रथम श्रेणी औसत कितना है?

उनका प्रथम श्रेणी औसत फिलहाल 17.25 है।

Ehtesham Arif

I’m Ehtesham Arif, lead cricket analyst at Kricket Wala with over 3 years of experience in cricket journalism. I’m passionate about bringing you reliable match analysis and the latest updates from the world of cricket. My favorite team is India, and in the IPL, I support Delhi Capitals.

Leave a Comment