“टूर्नामेंट ऑक्शन में नहीं जीते जाते, लेकिन वहीं ज़रूर हारे जा सकते हैं।”
RCB की WPL 2026 जीत के बाद हेड कोच मलोलन रंगराजन के ये शब्द पूरी यात्रा को बयान कर देते हैं। यह खिताब किसी एक रात का चमत्कार नहीं था, बल्कि महीनों की तैयारी, सही पहचान और हालात के हिसाब से खुद को ढालने की कहानी थी।
झटका
मेगा ऑक्शन से ठीक दो दिन पहले RCB को बड़ा झटका लगा, जब एलिस पेरी ने बताया कि वह WPL 2026 के लिए उपलब्ध नहीं होंगी। चार रिटेन खिलाड़ियों में से एक के बाहर होने से RCB के पास सिर्फ 6.15 करोड़ रुपये बचे। वहीं दूसरी टीमों, खासकर UP Warriorz के पास दोगुने से ज्यादा पैसे थे।
यहीं से RCB की रणनीति और ज्यादा सटीक हो गई। हर फैसला अब टूर्नामेंट तय करने वाला था।
दिशा
कप्तान स्मृति मंधाना ने एक छोटी लेकिन निर्णायक मीटिंग में पूरी दिशा साफ कर दी। बल्लेबाज़ी में टीम पहले से मजबूत थी, इसलिए ऑक्शन में फोकस एक खतरनाक बॉलिंग अटैक बनाने पर रखा गया।
सोच यह थी कि अगर गेंदबाज़ी से मैच कंट्रोल में रहे, तो बल्लेबाज़ी खुद रास्ता बना लेगी।
लॉरेन
बॉलिंग कोच की सिफारिश पर RCB ने लॉरेन बेल पर बड़ा दांव खेला। यह फैसला सीज़न के सबसे सही फैसलों में से एक साबित हुआ।
लॉरेन ने पूरे टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा डॉट बॉल फेंकीं और पावरप्ले में वही असर डाला, जो पुरुष क्रिकेट में टॉप तेज़ गेंदबाज़ डालते हैं। वह WPL 2026 की बॉलिंग MVP बनीं।
डी क्लर्क
ऑलराउंडर की तलाश RCB को नैडीन डी क्लर्क तक ले गई, जिन्हें सिर्फ 65 लाख में खरीदा गया। पहले ही मैच में उन्होंने MI के खिलाफ चार विकेट लिए और फिर 65/5 की मुश्किल स्थिति से नाबाद 63 रन ठोक दिए।
सीज़न खत्म होते-होते वह टूर्नामेंट की सबसे वैल्यूएबल खिलाड़ियों में शामिल हो चुकी थीं।
राधा
फाइनल में जीत के शॉट्स राधा यादव के बल्ले से आए, और यही इस कहानी की सबसे खूबसूरत बात थी। WPL 2026 से पहले उनकी पहचान एक स्पिनर तक सीमित थी।
लेकिन RCB के स्काउट्स जानते थे कि घरेलू क्रिकेट में वह गेंदबाज़ों पर हावी हो सकती हैं। पेरी की गैरमौजूदगी में उन्हें मिडिल ऑर्डर की जिम्मेदारी दी गई, और उन्होंने GG के खिलाफ 43/4 से मैच पलट कर भरोसा लौटा दिया।
तैयारी
राधा वर्ल्ड कप जीत के बाद देर से टीम से जुड़ीं, लेकिन RCB ने इंतज़ार नहीं किया। मुंबई के BKC ग्राउंड पर उनके लिए खास सेशन्स रखे गए, जहां आख़िरी ओवर चेज़, नंबर पांच पर बल्लेबाज़ी और पावर हिटिंग पर काम हुआ।
नतीजा फाइनल में दिखा, जब दबाव में उन्होंने चार गेंदों में आठ रन बनाकर ट्रॉफी दिला दी।
भरोसा
श्रेयंका पाटिल एक साल से ज्यादा क्रिकेट से दूर थीं। फिटनेस पूरी नहीं थी, फिर भी RCB ने उन पर भरोसा दिखाया।
यह भरोसा मैदान पर बदला, जब उन्होंने GG के खिलाफ पांच विकेट लेकर मिडिल ओवर्स को RCB की ताकत बना दिया।
मौके
इंजरी से जूझ रहीं पूजा वस्त्राकर को भी RCB ने मौका दिया। उनकी सीमित उपलब्धता ने एक और नाम को सामने लाया — सायली सतघरे। अनसोल्ड रहने के बावजूद, पेरी की रिप्लेसमेंट के तौर पर उन्होंने पहले तीन मैचों में आठ विकेट लेकर सबको चौंका दिया।
विश्वास
RCB ने पूरे टूर्नामेंट में दो बार 200 से ज्यादा का स्कोर चेज़ किया, जिसमें फाइनल का 204 रन भी शामिल था। यह आत्मविश्वास यूं ही नहीं आया।
ग्रेस हैरिस की निडर सोच और ऋचा घोष की 35/5 से 90 रन की पारी ने टीम को यकीन दिला दिया कि कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं है।
फाइनल
फाइनल से पहले जॉर्जिया वोल प्लान का हिस्सा नहीं थीं, लेकिन हालात बदले और RCB ने खुद को बदला। वोल और मंधाना की 165 रन की साझेदारी ने मैच वहीं खत्म कर दिया।
नतीजा
RCB की WPL 2026 ट्रॉफी किसी एक खिलाड़ी या एक मैच की कहानी नहीं है। यह सही सिस्टम, भरोसे और प्लानिंग का नतीजा है।
तीन साल में IPL और WPL मिलाकर तीसरी ट्रॉफी ने RCB को सिर्फ चैंपियन नहीं, बल्कि सबसे स्मार्ट फ्रेंचाइज़ में भी बदल दिया है। अगर यह मौजूदा मालिकों का आख़िरी टूर्नामेंट साबित हुआ, तो इससे बेहतर विदाई शायद मुमकिन नहीं थी।
FAQs
RCB की WPL 2026 रणनीति का फोकस क्या था?
मजबूत बॉलिंग अटैक और मल्टी-स्किल ऑलराउंडर्स।
एलिस पेरी की अनुपस्थिति से RCB ने कैसे निपटा?
राधा यादव, डी क्लर्क और ऑलराउंडर्स पर भरोसा किया।
RCB की सबसे बड़ी ऑक्शन खोज कौन रही?
नैडीन डी क्लर्क और लॉरेन बेल।
RCB ने कितनी बार 200+ रन चेज़ किए?
दो बार, जिसमें फाइनल का 204 भी शामिल है।
WPL 2026 का टाइटल किस बात का नतीजा था?
प्लानिंग, भरोसा और हालात के मुताबिक ढलने का।











