जर्मनी में लंबी छुट्टियां, स्पेन में रियल मैड्रिड का मैच देखने की प्लानिंग और IPL से पहले पूरी तरह ब्रेक लेने का मन। मोहम्मद सिराज की सोच बिल्कुल साफ थी। हैदराबाद में दोस्तों को सब बता दिया गया था और दिमाग क्रिकेट से दूर था।
जब टीम इंडिया के ट्रेनर एड्रियन ले रूक्स का फोन आया, तो सिराज ने साफ कह दिया कि अभी डिस्टर्ब नहीं होना है। उन्हें लगा था कि इंटरनेशनल क्रिकेट का यह चैप्टर फिलहाल बंद हो चुका है।
फोन
असल झटका तब लगा जब कप्तान सूर्यकुमार यादव का कॉल आया।
सिराज के मुताबिक, सूर्या ने सीधा कहा कि बैग पैक करो और तुरंत आ जाओ। पहले तो उन्हें लगा कि मज़ाक हो रहा है। लेकिन कॉल खत्म होते ही चयनकर्ता प्रज्ञान ओझा का फोन आया और तब यकीन हुआ कि यह वाकई वर्ल्ड कप का बुलावा है।
मोड़
घायल हर्षित राणा की जगह सिराज को टीम में शामिल किया गया। हालात ऐसे थे कि उन्हें मुश्किल से सोचने का वक्त भी नहीं मिला।
बैग पैक किया, फ्लाइट पकड़ी और सीधे वर्ल्ड कप मैच के लिए तैयार हो गए। सिराज मानते हैं कि इस मोड़ के सामने किसी भी प्लान की कोई अहमियत नहीं थी।
उनके शब्दों में, जो लिखा होता है वही होता है। वह आए, खेले और सब कुछ अपने आप जुड़ता चला गया।
मैच
लगभग 18 महीने बाद T20I खेलते हुए सिराज को सीधे प्लेइंग इलेवन में उतार दिया गया। भारत सिर्फ 161 रन डिफेंड कर रहा था और सामने थी United States। गलती की कोई गुंजाइश नहीं थी।
लेकिन सिराज को ऐसी परिस्थितियों की आदत रही है।
स्पेल
पहले चार ओवरों में ही मैच की कहानी बदल गई। USA का स्कोर 11/2 से 13/3 हो गया और यहीं मुकाबला भारत की पकड़ में चला गया।
सिराज ने पावरप्ले में दो बड़े विकेट लिए और आख़िरी गेंद पर तीसरा विकेट निकालकर अपनी वापसी पर मुहर लगा दी। उनके आंकड़े 3/29 रहे, लेकिन असर इससे कहीं बड़ा था।
18 महीने का ब्रेक, लेकिन धार ज़रा भी कम नहीं।
अनुभव
सिराज का आख़िरी T20I जुलाई 2024 में श्रीलंका के खिलाफ था। इसके बाद उन्होंने मान लिया था कि वर्ल्ड कप का सपना शायद पूरा नहीं होगा। रणजी ट्रॉफी में हैदराबाद की कप्तानी के बाद वह खुद को मानसिक और शारीरिक ब्रेक देना चाहते थे।
लेकिन क्रिकेट ने एक बार फिर उन्हें वहीं खड़ा कर दिया, जहां बड़े मौके मिलते हैं।
जसप्रीत बुमराह की गैरमौजूदगी में सिराज ने जिम्मेदारी ली और यह कोई नई बात नहीं थी। जब-जब वह लीड रोल में आए हैं, उन्होंने असर छोड़ा है।
रणनीति
सिराज की सोच बेहद सरल थी। उन्होंने वही किया जो उन्हें घरेलू क्रिकेट में सफलता दिलाता आया है। नई गेंद से विकेट टू विकेट लाइन, सही लेंथ और लगातार दबाव।
उनका मानना था कि नई गेंद आसान नहीं है, इसलिए बल्लेबाज़ों को टाइम नहीं देना था। वही प्लान उन्होंने मैदान पर उतारा।
साथ
नई गेंद पर उन्हें अर्शदीप सिंह का पूरा साथ मिला। सिराज ने माना कि अर्शदीप की शुरुआती तीन ओवर की स्पेल ने बल्लेबाज़ों पर दबाव बना दिया, जिसका फायदा उन्हें खुद मिला।
अर्शदीप के 2/18 के आंकड़े और सिराज की आक्रामक गेंदबाज़ी ने पावरप्ले में ही मैच भारत के पक्ष में झुका दिया।
कहानी
जर्मनी और स्पेन की टिकटें एक तरफ रह गईं। रियल मैड्रिड का मैच भी इंतज़ार करता रह गया। उसकी जगह आई एक वर्ल्ड कप की रात, तिरंगा और मैच जिताने वाला स्पेल।
मोहम्मद सिराज की यह वापसी सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं है। यह उस तरह की कहानी है, जो याद दिलाती है कि क्रिकेट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि किस्मत, मेहनत और मौके को पकड़ने की कला भी है।
FAQs
मोहम्मद सिराज को वर्ल्ड कप टीम में कैसे मौका मिला?
हर्षित राणा के चोटिल होने के बाद उन्हें रिप्लेसमेंट के तौर पर बुलाया गया।
सिराज ने USA के खिलाफ कितने विकेट लिए?
उन्होंने 3 विकेट लेकर मैच जिताने में अहम भूमिका निभाई।
सिराज ने आखिरी T20I इससे पहले कब खेला था?
जुलाई 2024 में श्रीलंका के खिलाफ।
USA के खिलाफ भारत की जीत में टर्निंग पॉइंट क्या रहा?
पहले चार ओवरों में तीन विकेट गिरना।
सिराज ने अपनी सफलता का श्रेय किसे दिया?
भगवान, अनुभव और अपनी सरल गेंदबाज़ी योजना को।











