औकिब नबी की मेहनत और डोगरा की अगुवाई से चमका जम्मू-कश्मीर का रणजी सपना

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Ranji Trophy

“अगर आपको टॉप लेवल पर खेलना है तो मेहनत करनी ही होगी। इसका कोई शॉर्टकट नहीं है।”
बरामुला के तेज़ गेंदबाज़ औकिब नबी के ये शब्द आज जम्मू-कश्मीर के रणजी अभियान की पहचान बन चुके हैं।

सीजन के ओपनर में मजबूत मुंबई के खिलाफ सात विकेट लेने के बावजूद टीम 35 रन से हार गई थी। लेकिन वही मैच इस बात का संकेत था कि यह टीम झुकने वाली नहीं है। पिछले सीजन 44 विकेट लेने वाले नबी ने इस बार 46 विकेट झटककर टीम को पहली बार सेमीफाइनल तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

उदय

जम्मू-कश्मीर की यह सफलता अचानक नहीं आई। यह कई सालों की योजना और धैर्य का नतीजा है।

कोच अजय शर्मा और कप्तान परस डोगरा की जोड़ी ने टीम को नई दिशा दी। डोगरा, जो पिछले सीजन के बाद संन्यास लेने वाले थे, बोर्ड के आग्रह पर एक और साल खेलने को तैयार हुए – और यही फैसला ऐतिहासिक साबित हुआ।

“जब किस्मत में लिखा होता है, कोई बदल नहीं सकता,” डोगरा ने मुस्कराते हुए कहा।

नेतृत्व

41 वर्षीय कप्तान ने ड्रेसिंग रूम में स्थिरता और विश्वास पैदा किया। हर खिलाड़ी को अपनी भूमिका समझाई गई और खुलकर खेलने की आज़ादी दी गई।

पिछले सीजन क्वार्टरफाइनल तक पहुंचने के बाद टीम को भरोसा हो गया था कि सामूहिक प्रयास से रणजी जीतना असंभव नहीं है। छोटे-छोटे लक्ष्यों पर फोकस ने बड़े सपने की नींव रखी।

गेंदबाज़ी

इस अभियान की रीढ़ गेंदबाज़ी रही है – और सबसे आगे रहे औकिब नबी।

क्वार्टरफाइनल में मध्य प्रदेश के खिलाफ उनका 12/110 का मैच हॉल निर्णायक साबित हुआ। लेकिन यह सिर्फ एक खिलाड़ी की कहानी नहीं है।

खिलाड़ीप्रकारविकेट
औकिब नबीतेज़46
सुनील कुमारलेफ्ट-आर्म पेस22
आबिद मुश्ताकलेफ्ट-आर्म स्पिन19
युधवीर सिंहराइट-आर्म पेस16
वंशज शर्माऑफ-स्पिन6/68 (दिल्ली)

तेज़ और स्पिन का संतुलन – यही जम्मू-कश्मीर की सबसे बड़ी ताकत बना।

बल्लेबाज़ी

पहले बल्लेबाज़ी को टीम की कमजोरी माना जाता था। लेकिन इस बार जिम्मेदारी बंटी हुई दिखी।

अब्दुल समद इस सीजन टीम के रन-लीडर बनकर उभरे:

  • 8 मैच
  • 543 रन
  • औसत 54.30
  • 1 शतक, 3 अर्धशतक

हैदराबाद के खिलाफ दूसरी पारी का उनका शतक सीजन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। आंकड़ों से ज्यादा अहम था वह समय – जब टीम को सहारे की जरूरत थी।

संतुलन

अब जम्मू-कश्मीर एक खिलाड़ी पर निर्भर नहीं है। यह एक सिस्टम पर चलने वाली टीम बन चुकी है:

  • अनुभवी कप्तान
  • फॉर्म में तेज़ गेंदबाज़
  • भरोसेमंद स्पिनर
  • जिम्मेदार मिडिल ऑर्डर

यही संतुलन उन्हें अलग बनाता है।

सपना

सेमीफाइनल में बंगाल के खिलाफ उतरते समय टीम जानती है कि असली परीक्षा अब शुरू होती है। लेकिन इतिहास पहले ही बन चुका है – पहली बार रणजी ट्रॉफी के सेमीफाइनल में पहुंचना।

कश्मीर की वादियों से उठी यह टीम अब भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे बड़े मंच पर खड़ी है।

और जैसा औकिब नबी ने कहा था –
मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता।

जम्मू-कश्मीर ने यह साबित कर दिया है।

FAQs

औकिब नबी ने इस सीजन कितने विकेट लिए हैं?

उन्होंने अब तक 46 विकेट लिए हैं।

जम्मू-कश्मीर किस उपलब्धि तक पहली बार पहुंचा है?

टीम पहली बार रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में पहुंची है।

अब्दुल समद ने कितने रन बनाए हैं?

उन्होंने 8 मैचों में 543 रन बनाए हैं।

कप्तान परस डोगरा की उम्र कितनी है?

परस डोगरा 41 वर्ष के हैं।

जम्मू-कश्मीर की सफलता का मुख्य कारण क्या है?

सामूहिक प्रयास, अनुशासन और नेतृत्व।

Ehtesham Arif

I’m Ehtesham Arif, lead cricket analyst at Kricket Wala with over 3 years of experience in cricket journalism. I’m passionate about bringing you reliable match analysis and the latest updates from the world of cricket. My favorite team is India, and in the IPL, I support Delhi Capitals.

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