क्रिकेट कई खिलाड़ियों के लिए सिर्फ खेल नहीं, बल्कि जिंदगी का अहम हिस्सा होता है। Navneet Dhaliwal भी उन्हीं खिलाड़ियों में से एक रहे हैं। 37 साल की उम्र में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला कर लिया है। चेन्नई में अफगानिस्तान के खिलाफ ग्रुप स्टेज मुकाबला उनका आखिरी मैच होगा।
यह फैसला अचानक नहीं था। उन्होंने खुद बताया कि यह निर्णय पहले ही ले लिया गया था। 12 साल से ज्यादा लंबे करियर के बाद वे अब नई पीढ़ी को मौका देना चाहते हैं।
करियर शुरुआत
ढालीवाल ने जनवरी 2015 में नामीबिया में वर्ल्ड क्रिकेट लीग 2 के दौरान सीनियर डेब्यू किया था। इससे पहले कनाडा ए टीम के साथ जिम्बाब्वे दौरे पर उनका प्रदर्शन शानदार रहा, जिसने उन्हें राष्ट्रीय टीम तक पहुंचाया।
उनका रिकॉर्ड भी मजबूत रहा। उन्होंने 18 वनडे और 48 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। टी20 फॉर्मेट में वे कनाडा के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ियों में शामिल रहे।
नेतृत्व भूमिका
Canada national cricket team की कप्तानी करना उनके करियर का अहम अध्याय रहा। खासकर 2024 टी20 विश्व कप में टीम की अगुवाई करना किसी भी खिलाड़ी के लिए गर्व की बात है।
2024 टी20 विश्व कप में अमेरिका के खिलाफ 61 रन की पारी उनके करियर के सबसे यादगार पलों में से एक रही। यह कनाडा के लिए टी20 विश्व कप इतिहास का पहला अर्धशतक था।
उन्होंने कहा था कि विश्व कप के लिए क्वालिफाई करना और कप्तान बनना उनके जीवन के सबसे खास अनुभवों में शामिल है।
पुनर्निर्माण दौर
2019 में जब कनाडा ODI स्टेटस हासिल करने में नाकाम रहा, तब टीम मुश्किल दौर से गुजर रही थी। ऐसे समय में ढालीवाल ने जिम्मेदारी संभाली। 2019 से 2023 के बीच उन्होंने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया और टीम को दोबारा खड़ा करने में बड़ी भूमिका निभाई।
2023 में कनाडा ने फिर से ODI स्टेटस हासिल किया। नेपाल और नामीबिया के खिलाफ अहम पारियों ने उनकी उपयोगिता साबित की।
आखिरी अध्याय
ICC Men’s T20 World Cup में भी उन्होंने दिखाया कि अनुभव कितना मायने रखता है। तीन मैचों में 108 रन बनाकर उन्होंने टीम को मजबूती दी। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 64 रन की पारी उनके क्लास का उदाहरण रही।
जब कोई खिलाड़ी टीम के लिए योगदान देते हुए सम्मान के साथ विदा ले, तो वह करियर का आदर्श अंत माना जाता है। ढालीवाल का संन्यास भी कुछ ऐसा ही है।
भविष्य योजना
हालांकि उनका अंतरराष्ट्रीय सफर खत्म हो रहा है, लेकिन क्रिकेट से रिश्ता बना रहेगा। उन्होंने साफ किया है कि वे कोचिंग में आना चाहते हैं, हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर नहीं। उनकी इच्छा है कि वे युवा खिलाड़ियों को तैयार करें और जमीनी स्तर पर काम करें।
उनके शब्दों में क्रिकेट खून में बस जाता है, इसे पूरी तरह छोड़ना आसान नहीं।
विरासत
ढालीवाल सिर्फ रन बनाने वाले बल्लेबाज नहीं थे, बल्कि कनाडाई क्रिकेट के पुनर्जागरण का चेहरा रहे। 29 टी20 मैचों में कप्तानी और 21 जीतें बताती हैं कि वे रणनीतिक सोच रखने वाले लीडर थे।
हर खिलाड़ी का करियर एक दिन खत्म होता है, लेकिन कुछ खिलाड़ी अपनी छाप छोड़ जाते हैं। नवनीत ढालीवाल ने भी अपने समर्पण, नेतृत्व और प्रदर्शन से कनाडा क्रिकेट में एक नई कहानी लिखी है।
अब जब वे मैदान को अलविदा कह रहे हैं, तो यह सिर्फ एक खिलाड़ी की विदाई नहीं, बल्कि एक दौर का अंत है। आने वाली पीढ़ी के लिए उनकी यात्रा हमेशा प्रेरणा बनी रहेगी।
FAQs
ढालीवाल का आखिरी मैच कौन सा है?
अफगानिस्तान के खिलाफ ग्रुप मैच।
उन्होंने कितने T20I खेले?
कुल 48 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच।
2026 WC में कितने रन बनाए?
तीन मैच में 108 रन।
क्या वे कोचिंग करेंगे?
हां, युवाओं को कोचिंग देना चाहते हैं।
कप्तान के रूप में कितनी जीतें?
29 में से 21 टी20I जीत।











