क्रिकेट की दुनिया में कुछ कहानियां सिर्फ रन और विकेट से नहीं बनतीं। कुछ कहानियां हौसले, संघर्ष और खुद को दोबारा साबित करने की होती हैं। अजय शर्मा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जहां गिरकर उठना ही असली जीत बन गया।
एक समय मैच फिक्सिंग के आरोपों से घिरे इस पूर्व भारतीय बल्लेबाज़ ने अदालत से क्लीन चिट मिलने के बाद अपनी जिंदगी को नए सिरे से शुरू किया। आज वही अजय शर्मा जम्मू-कश्मीर की टीम को रणजी ट्रॉफी के फाइनल तक पहुंचाकर नई पहचान बना चुके हैं।
नई शुरुआत
जब 2022-23 सीजन से पहले अजय शर्मा ने जम्मू-कश्मीर टीम की जिम्मेदारी संभाली, तब हालात आसान नहीं थे। टीम में टैलेंट था, लेकिन रेड-बॉल क्रिकेट के लिए जरूरी धैर्य और लंबी सोच की कमी साफ नजर आती थी।
कई खिलाड़ी IPL के सपनों में खोए थे, लेकिन टेस्ट जैसी मानसिकता तैयार नहीं हो पा रही थी। अजय के लिए यह सिर्फ टीम को संभालने का काम नहीं था, बल्कि खुद के लिए भी दूसरा मौका था।
संघर्ष
पहला साल बेहद मुश्किल रहा। हालात इतने चुनौतीपूर्ण थे कि 13 खिलाड़ियों ने लिखकर दिया कि उन्हें उनकी कोचिंग स्टाइल पसंद नहीं। किसी भी कोच के लिए यह बड़ा झटका हो सकता था।
लेकिन अजय ने इसे हार नहीं माना। उन्होंने खुद को बदला, अपनी अप्रोच बदली और सख्त कोच से दोस्ताना गाइड की भूमिका अपनाई। यहीं से बदलाव की असली शुरुआत हुई।
बदलाव
उन्होंने खिलाड़ियों से खुलकर बातचीत की। उनकी परेशानियां समझीं, उनके लक्ष्य जाने और धीरे-धीरे विश्वास का रिश्ता बनाया। टीम का रवैया बदलने लगा और ड्रेसिंग रूम का माहौल भी सकारात्मक हुआ।
अब फोकस सिर्फ बड़े शॉट्स या IPL कॉन्ट्रैक्ट पर नहीं, बल्कि लंबी पारियों और मैच जीतने पर था। व्यक्तिगत सोच की जगह सामूहिक लक्ष्य ने ले ली।
मानसिकता
अजय का मानना है कि क्रिकेट में तकनीक से ज्यादा मानसिक मजबूती जरूरी है। उनका एक मंत्र टीम के अंदर गूंजता रहता है – हम खेल खेलते हैं, विरोधी को नहीं।
सेमीफाइनल में बंगाल के खिलाफ पहली पारी में पिछड़ने के बावजूद टीम ने वापसी की। यह बदली हुई सोच और आत्मविश्वास का साफ सबूत था।
जज्बा
जम्मू-कश्मीर के कई खिलाड़ी ऐसे इलाकों से आते हैं जहां बुनियादी सुविधाएं भी मुश्किल से मिलती हैं। लेकिन उनके अंदर आगे बढ़ने की भूख है। यही जज्बा टीम की असली ताकत बना।
तेज गेंदबाज सुनील कुमार इसका उदाहरण हैं। संघर्ष भरे जीवन से निकलकर आज वह टीम की मजबूती बन चुके हैं। उनका जुझारू रवैया बाकी खिलाड़ियों को भी प्रेरित करता है।
सितारा
औक़िब नबी इस टीम के उभरते हुए सितारे हैं। उनकी तुलना मोहम्मद शमी से की जाती है। भले ही स्पीड थोड़ी कम हो, लेकिन लाइन-लेंथ और कंट्रोल शानदार है।
चाहे पाटा विकेट हो या ग्रीन टॉप, उनका माइंडसेट नहीं बदलता। सही एरिया में गेंद डालना और लगातार विकेट निकालना उनकी खासियत है।
फाइनल
रणजी ट्रॉफी का फाइनल सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि संभावनाओं का दरवाजा है। अजय ने खिलाड़ियों से कहा है कि एक खिताब उनकी जिंदगी बदल सकता है।
इंडिया कॉल-अप, इंडिया ए या IPL कॉन्ट्रैक्ट, सब कुछ एक शानदार प्रदर्शन से संभव है। उनका मशहूर वाक्य अब टीम का मंत्र बन चुका है — चैंपियन टीम, चैंपियंस की टीम को हरा सकती है।
पहचान
रेड-बॉल क्रिकेट को अजय दूसरा मौका मानते हैं। जैसे उन्हें जिंदगी में दोबारा खुद को साबित करने का अवसर मिला, वैसे ही क्रिकेट भी खिलाड़ियों को वापसी का मंच देता है।
चाहे फाइनल का नतीजा कुछ भी हो, जम्मू-कश्मीर की टीम ने घरेलू क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बना ली है। असली जीत सिर्फ ट्रॉफी नहीं, बल्कि विश्वास, एकजुटता और पुनर्जन्म की कहानी है।
FAQs
अजय शर्मा कब कोच बने?
वे 2022-23 सीजन से पहले कोच बने।
टीम की सबसे बड़ी ताकत क्या है?
मजबूत मानसिकता और टीम भावना।
औक़िब नबी की खासियत क्या है?
सटीक लाइन-लेंथ और फोकस।
पहला साल कैसा रहा?
बहुत चुनौतीपूर्ण और कठिन।
फाइनल किसके खिलाफ है?
कर्नाटक के खिलाफ।













