लगभग दो दशकों तक भारतीय क्रिकेट एक स्थिर नेतृत्व मॉडल पर चलता रहा, जिसे आम तौर पर वन-कैप्टन मॉडल कहा जाता है। इस दौर में टीम इंडिया को ऐसे कप्तान मिले जिन्होंने धीरे-धीरे जिम्मेदारी संभाली और फिर तीनों फॉर्मेट में टीम का नेतृत्व किया। इस सूची में एमएस धोनी, विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे नाम शामिल रहे। यह मॉडल लंबे समय तक सफल रहा, लेकिन 2024 के बाद भारतीय क्रिकेट की नेतृत्व संरचना में बदलाव साफ दिखने लगा है।
संक्रमण
2024 टी20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद रोहित शर्मा ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया, जबकि उन्होंने टेस्ट और वनडे में कप्तानी जारी रखी। इस फैसले के बाद बीसीसीआई को टी20 फॉर्मेट के लिए नए कप्तान की तलाश करनी पड़ी। चयनकर्ताओं ने सूर्यकुमार यादव को यह जिम्मेदारी सौंपी, जिनके नेतृत्व में भारत ने आक्रामक खेल शैली अपनाई और द्विपक्षीय सीरीज में लगातार अच्छे नतीजे हासिल किए।
निर्णय
सूर्यकुमार यादव के कार्यकाल के बाद चयन समिति के सामने कई विकल्प मौजूद थे। शुभमन गिल पहले से टेस्ट और वनडे कप्तान थे और आईपीएल 2026 में गुजरात टाइटंस के साथ उनके नेतृत्व की सराहना भी हुई थी। ऐसे में एक बार फिर ऑल-फॉर्मेट कप्तान चुनना आसान रास्ता हो सकता था। हालांकि बीसीसीआई ने इस दिशा में आगे बढ़ने के बजाय टी20 कप्तानी के लिए श्रेयस अय्यर को चुना, जिससे यह संकेत मिला कि बोर्ड अब फॉर्मेट आधारित नेतृत्व को प्राथमिकता दे रहा है।
प्रयोग
बीसीसीआई ने इस बदलाव से पहले सीमित स्तर पर प्रयोग भी किया था। अगस्त 2025 में शुभमन गिल को टी20 टीम का उपकप्तान बनाया गया, जिससे यह माना जा रहा था कि वह भविष्य में तीनों फॉर्मेट के कप्तान बन सकते हैं। हालांकि टी20 क्रिकेट में अपेक्षित प्रदर्शन न मिलने और टीम संयोजन की जरूरतों के कारण उन्हें 2026 टी20 वर्ल्ड कप से पहले टीम से बाहर कर दिया गया। इसके बाद उपकप्तानी की जिम्मेदारी अक्षर पटेल को सौंपी गई।
इतिहास
पिछले 20 वर्षों में भारत के पास केवल तीन ऐसे कप्तान रहे जिन्होंने तीनों फॉर्मेट में टीम का नेतृत्व किया। एमएस धोनी के नेतृत्व में भारत ने 2007 टी20 वर्ल्ड कप, 2011 वनडे वर्ल्ड कप और 2013 चैंपियंस ट्रॉफी जीती। विराट कोहली का दौर टेस्ट क्रिकेट में भारत के मजबूत प्रदर्शन के लिए जाना जाता है, खासकर ऑस्ट्रेलिया में लगातार दो टेस्ट सीरीज जीत के लिए। रोहित शर्मा ने 2024 टी20 वर्ल्ड कप और 2025 चैंपियंस ट्रॉफी जीतकर भारत के आईसीसी ट्रॉफी सूखे को खत्म किया।
आंकड़े
इन तीनों कप्तानों का संयुक्त रिकॉर्ड बताता है कि वन-कैप्टन मॉडल ने भारत को निरंतर सफलता दी, लेकिन हर दौर में किसी न किसी फॉर्मेट में सीमाएं भी सामने आईं। धोनी, कोहली और रोहित के नेतृत्व में भारत ने सैकड़ों मैच खेले और उच्च जीत प्रतिशत दर्ज किया, फिर भी सभी फॉर्मेट में एकसाथ शीर्ष प्रदर्शन बनाए रखना आसान नहीं रहा।
लाभ
स्प्लिट कप्तानी का सबसे स्पष्ट असर सूर्यकुमार यादव के टी20 कार्यकाल में देखने को मिला। टीम ने आक्रामक बल्लेबाजी को प्राथमिकता दी और अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, तिलक वर्मा, हार्दिक पांड्या और शिवम दुबे जैसे खिलाड़ियों को खुलकर खेलने की आजादी मिली। नतीजतन भारत नियमित रूप से बड़े स्कोर बनाने लगा और टी20 में जीत का प्रतिशत 80 के करीब पहुंच गया।
प्रबंधन
अलग-अलग कप्तानों के होने से वर्कलोड मैनेजमेंट भी आसान हुआ। जसप्रीत बुमराह और हार्दिक पांड्या जैसे खिलाड़ियों को चुनिंदा सीरीज में ही खिलाया गया, जिससे वे बड़े टूर्नामेंट के लिए फिट और तरोताजा रहे। इसका असर यह हुआ कि प्रमुख प्रतियोगिताओं में टीम का प्रदर्शन अधिक संतुलित नजर आया।
दृष्टिकोण
टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर लंबे समय से फॉर्मेट आधारित कप्तानी के समर्थक रहे हैं। उनका मानना है कि रेड-बॉल और व्हाइट-बॉल क्रिकेट की मांगें अलग होती हैं और नेतृत्व भी उसी के अनुसार होना चाहिए। वहीं मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर इस मुद्दे पर संतुलित रुख रखते हैं और मानते हैं कि बहुत अधिक बदलाव से रणनीतिक अस्थिरता भी आ सकती है।
स्थिति
वर्तमान परिदृश्य में नेतृत्व संरचना स्पष्ट है। टी20 टीम की कप्तानी श्रेयस अय्यर के पास है, जबकि टेस्ट और वनडे में शुभमन गिल टीम की अगुआई कर रहे हैं। यह मॉडल लंबे समय तक टिकेगा या भविष्य में फिर बदलाव होगा, इसका आकलन आने वाले वर्षों के प्रदर्शन से किया जाएगा।
भारतीय क्रिकेट अब एक ही कप्तान पर निर्भर रहने के बजाय फॉर्मेट के अनुसार नेतृत्व तय करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आधुनिक क्रिकेट की व्यस्तता और अलग-अलग प्रारूपों की जरूरतों को देखते हुए यह बदलाव स्वाभाविक माना जा रहा है। यदि सही संतुलन बना रहा, तो मल्टी-कैप्टन युग भी भारत के लिए उतना ही प्रभावी साबित हो सकता है, जितना कभी वन-कैप्टन मॉडल रहा था।
FAQs
भारत का नया टी20 कप्तान कौन है?
श्रेयस अय्यर भारत के नए टी20 कप्तान हैं।
क्या भारत में स्प्लिट कप्तानी लागू हो चुकी है?
हां, टी20 और टेस्ट-वनडे के लिए अलग कप्तान हैं।
भारत के पिछले ऑल-फॉर्मेट कप्तान कौन थे?
धोनी, कोहली और रोहित शर्मा।
सूर्यकुमार यादव का टी20 रिकॉर्ड कैसा रहा?
उनकी जीत प्रतिशत 80% से अधिक रही।
स्प्लिट कप्तानी का सबसे बड़ा फायदा क्या है?
वर्कलोड मैनेजमेंट और फॉर्मेट-स्पेसिफिक रणनीति।











