टीम इंडिया की आयरलैंड और इंग्लैंड के आगामी व्हाइट-बॉल दौरे की तैयारियों को एक अहम झटका लगा है। तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी चोट के कारण चयन के लिए उपलब्ध नहीं रहेंगे। पहले से ही सीमित सीम-बॉलिंग ऑलराउंड विकल्पों के बीच यह स्थिति टीम मैनेजमेंट के लिए अतिरिक्त चुनौती बनकर सामने आई है।
चोट
नीतीश कुमार रेड्डी को अफगानिस्तान के खिलाफ हालिया वनडे सीरीज के दौरान चोट लगी थी। मेडिकल जांच में उनके बाएं क्वाड्रिसेप्स मसल में सूजन और फाइबर डिसरप्शन की पुष्टि हुई है। इसके बाद उन्हें भारत के आगामी लिमिटेड-ओवर्स दौरे से बाहर कर दिया गया है।
मेडिकल अपडेट के अनुसार, रेड्डी को आगे की जांच और रिहैबिलिटेशन के लिए BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में रिपोर्ट करने को कहा गया है। बोर्ड की ओर से स्पष्ट किया गया है कि उनकी रिकवरी की प्रगति पर लगातार नजर रखी जाएगी।
पृष्ठभूमि
अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज में रेड्डी ने दो मैच खेले थे, लेकिन लखनऊ में हुए दूसरे मुकाबले में वह मैदान पर नहीं उतर सके थे। उस समय टीम के गेंदबाजी कोच मॉर्ने मोर्कल ने संकेत दिया था कि चोट गंभीर नहीं लग रही है, हालांकि बाद में कराए गए स्कैन में समस्या अपेक्षा से अधिक पाई गई।
रिहैब
सूत्रों के मुताबिक, रेड्डी को कम से कम चार सप्ताह रिहैबिलिटेशन प्रक्रिया में रहना होगा। इसके बाद ही उनकी वापसी की समयसीमा को लेकर कोई स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी। उनकी रिकवरी इस बात पर निर्भर करेगी कि शरीर इलाज और प्रशिक्षण पर कैसी प्रतिक्रिया देता है, ऐसे में उनकी अनुपस्थिति आगे भी बढ़ सकती है।
प्रभाव
यह स्थिति रेड्डी के लिए व्यक्तिगत रूप से भी निराशाजनक मानी जा रही है। हाल के महीनों में उनका अंतरराष्ट्रीय करियर तेजी से आगे बढ़ा था और आगामी दौरे में उनसे टीम को संतुलन देने की उम्मीद थी। चोट के कारण इस क्रम में रुकावट आना स्वाभाविक रूप से एक बड़ा झटका है।
विकल्प
रेड्डी के बाहर होने से भारत के सीम-बॉलिंग ऑलराउंड विकल्प और सीमित हो गए हैं। हार्दिक पांड्या भी इस समय क्वाड्रिसेप्स से जुड़ी समस्या से जूझ रहे हैं और लगातार दस ओवर गेंदबाजी करने की स्थिति में नहीं हैं। ऐसे में रेड्डी को हार्दिक के संभावित बैकअप के तौर पर देखा जा रहा था।
करियर
महज 23 वर्ष की उम्र में नीतीश कुमार रेड्डी भारत के लिए तीनों फॉर्मेट खेल चुके हैं। उन्होंने अब तक टेस्ट, वनडे और T20I में नियमित अंतराल पर मौके हासिल किए हैं और अपने प्रदर्शन से खुद को होनहार ऑलराउंडरों की सूची में शामिल किया है।
गति
पिछले कुछ समय में रेड्डी की गेंदबाजी की रफ्तार में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला था। स्वतंत्र फास्ट-बॉलिंग कोच स्टेफन जोन्स के साथ काम करने के बाद उनकी गति 120 किमी प्रति घंटे से बढ़कर नियमित रूप से 135 किमी प्रति घंटे तक पहुंच गई थी। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि रफ्तार के साथ शरीर पर बढ़ा दबाव भी चोट के जोखिम को बढ़ाता है।
आगे
फिलहाल टीम इंडिया और मेडिकल स्टाफ की प्राथमिकता रेड्डी की पूरी तरह से रिकवरी सुनिश्चित करना है। ऑलराउंडर की वापसी का फैसला उनकी फिटनेस स्थिति को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी तरह की जटिलता से बचा जा सके।
नीतीश कुमार रेड्डी का बाहर होना टीम इंडिया के लिए समय से पहले आई एक चुनौती है। जहां टीम को आगामी दौरे में संतुलन की जरूरत थी, वहीं एक उभरते खिलाड़ी की यह अनुपस्थिति चयन विकल्पों को सीमित करती है। अब ध्यान उनकी रिकवरी और सुरक्षित वापसी पर रहेगा, ताकि वे आगे के दौरों के लिए फिर से उपलब्ध हो सकें।
FAQs
नीतीश कुमार रेड्डी क्यों बाहर हुए हैं?
बाएं क्वाड्रिसेप्स की चोट के कारण उन्हें बाहर किया गया है।
रेड्डी को चोट कब लगी?
अफगानिस्तान के खिलाफ ODI सीरीज़ के दौरान उन्हें चोट लगी।
रेड्डी कितने समय तक बाहर रह सकते हैं?
कम से कम चार हफ्ते रिहैबिलिटेशन में रहेंगे।
यह टीम इंडिया के लिए क्यों बड़ा झटका है?
वह एक अहम तेज़ गेंदबाजी ऑलराउंड विकल्प थे।
नीतीश रेड्डी ने कितने अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं?
उन्होंने कुल 20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं।











