भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज़ संजू सैमसन ने अपने क्रिकेट करियर के सबसे बड़े बदलाव के पीछे की कहानी साझा की है। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा था जब वह लगातार दूसरों की सलाह और तुलना के दबाव में रहते थे, लेकिन फिर उन्होंने फैसला किया कि अब वह अपने तरीके से क्रिकेट खेलेंगे। यही सोच उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई और उन्होंने टी20 विश्व कप में भारत को चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई।
जियोस्टार के कार्यक्रम Believe में बातचीत के दौरान संजू ने खुलकर बताया कि मानसिक मजबूती, आत्मविश्वास और सही फैसले ने उनके खेल को पूरी तरह बदल दिया। उनका कहना है कि क्रिकेट में सिर्फ तकनीक ही नहीं, बल्कि खुद पर भरोसा भी उतना ही जरूरी होता है।
सफर
संजू सैमसन ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार बल्लेबाज़ी करते हुए 321 रन बनाए और भारत के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बने। उनके लगातार बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का सम्मान भी मिला। यह उपलब्धि सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने साबित किया कि सही मानसिकता खिलाड़ी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।
विराट
संजू ने बताया कि भारतीय टीम के एक कैंप के दौरान उन्होंने विराट कोहली से सलाह मांगी थी। उन्हें उम्मीद थी कि विराट बल्लेबाज़ी की तकनीक पर बात करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
संजू के मुताबिक, विराट ने उन्हें बताया कि अगर लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलना है तो सबसे पहले अपनी लाइफस्टाइल सुधारनी होगी। उन्होंने फिटनेस, सही खानपान और रिकवरी पर खास ध्यान देने की सलाह दी। संजू ने करीब डेढ़ साल तक इस रूटीन को फॉलो भी किया। हालांकि बाद में वह इसे लगातार जारी नहीं रख सके, लेकिन उस दौरान मिली सीख आज भी उनके काम आती है।
फैसला
संजू ने खुलासा किया कि 2026 टी20 विश्व कप से पहले वह टीम में ईशान किशन से पीछे चल रहे थे। उसी दौरान उन्होंने अपनी सोच पूरी तरह बदलने का फैसला किया।
उन्होंने कहा कि भारत में हर जगह एक तरह की रैट रेस चलती रहती है और उन्होंने तय कर लिया कि अब वह इस दौड़ का हिस्सा नहीं बनेंगे। उनका मानना है कि हर खिलाड़ी का अपना अलग तरीका होता है, इसलिए अब कोई उन्हें यह नहीं बताएगा कि कैसे बल्लेबाज़ी करनी है। उनके मुताबिक अब उनके करियर से जुड़े फैसले वही खुद लेते हैं और इसी बदलाव ने उन्हें मैदान पर खुलकर खेलने का आत्मविश्वास दिया।
बदलाव
मानसिक बदलाव के बाद संजू के खेल में भी बड़ा अंतर दिखाई दिया। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में लगातार मैच जिताने वाली पारियां खेलीं। वेस्टइंडीज़ के खिलाफ अहम मुकाबले से लेकर न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल तक उन्होंने जिम्मेदारी के साथ बल्लेबाज़ी की और भारत की खिताबी जीत में बड़ी भूमिका निभाई।
आर्चर
सेमीफाइनल में इंग्लैंड के तेज गेंदबाज़ जॉफ्रा आर्चर उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती माने जा रहे थे। इससे पहले आर्चर कई बार उन्हें आउट कर चुके थे और मैच से पहले भी लोग उन्हें यही याद दिला रहे थे।
लेकिन संजू ने इन बातों पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने अपनी तैयारी और योजना पर भरोसा रखा। इसका नतीजा यह रहा कि उन्होंने आर्चर के खिलाफ सिर्फ 14 गेंदों में 38 रन बना डाले। इस मुकाबले में उन्होंने 42 गेंदों पर 89 रन की शानदार पारी खेली और भारत को 253 रन के बड़े स्कोर तक पहुंचाया।
फाइनल
न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल में संजू ने अलग अंदाज में बल्लेबाज़ी की। उन्होंने कहा कि उस समय उनका लक्ष्य सिर्फ टिककर खेलना और मैच को आखिर तक खत्म करना था।
उन्होंने बताया कि उन्हें पता था कि उस वक्त टीम को उनकी जरूरत है। इसलिए उन्होंने जोखिम लेने की बजाय हालात के हिसाब से बल्लेबाज़ी की और अंत तक क्रीज पर बने रहने पर पूरा ध्यान दिया।
धैर्य
संजू का मानना है कि जब खिलाड़ी को अपनी क्षमता पर भरोसा होता है तो वह कुछ डॉट गेंदों से परेशान नहीं होता।
उन्होंने बताया कि फाइनल में मिशेल सैंटनर के एक ओवर में उन्होंने लगातार चार डॉट गेंदें खेलीं, लेकिन उन्हें पूरा विश्वास था कि बाद में बड़े शॉट लगाने का मौका मिलेगा। उनके मुताबिक पहले वह शायद जल्दबाजी में बड़ा शॉट खेलने की कोशिश करते, लेकिन इस बार उनके पास साफ योजना थी और उसी का फायदा मिला।
टीम
संजू ने अपने साथी खिलाड़ियों की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि ईशान किशन ने पूरे टूर्नामेंट में अहम साझेदारियां निभाईं और टीम को मुश्किल हालात से बाहर निकाला।
वहीं जसप्रीत बुमराह की तारीफ करते हुए उन्होंने उन्हें टीम इंडिया का “चीट कोड” बताया। संजू के मुताबिक अगर बुमराह टीम में नहीं होते तो इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत की राह इतनी आसान नहीं होती।
भविष्य
भविष्य को लेकर संजू काफी सहज नजर आए। उन्होंने कहा कि वह ज्यादा आगे की नहीं सोचते।
उनके मुताबिक 2024 विश्व कप के बाद उन्हें खुद भी उम्मीद नहीं थी कि वह 2026 विश्व कप का हिस्सा बनेंगे। इसलिए 2028 के बारे में अभी से सोचने का कोई मतलब नहीं है। अगर वह अच्छा खेलते रहेंगे और टीम को उनकी जरूरत होगी तो आगे का रास्ता अपने आप बन जाएगा।
आंकड़े
टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में संजू सैमसन अब तक 66 मैचों में 1,432 रन बना चुके हैं। इस दौरान उनका औसत 27.01 और स्ट्राइक रेट 155.99 रहा है। उनके नाम 3 शतक और 6 अर्धशतक भी दर्ज हैं।
वनडे क्रिकेट में उन्होंने 16 मुकाबलों में 510 रन बनाए हैं। इस प्रारूप में उनका औसत 56.66 है, जबकि वह 1 शतक और 3 अर्धशतक भी लगा चुके हैं।
संजू सैमसन की कहानी सिर्फ क्रिकेट में सफलता की नहीं, बल्कि सही सोच और आत्मविश्वास की भी मिसाल है। उन्होंने साबित किया कि जब खिलाड़ी दूसरों की अपेक्षाओं से ज्यादा खुद पर भरोसा करना सीख जाता है, तब उसका प्रदर्शन भी पूरी तरह बदल जाता है। यही सोच उन्हें भारतीय क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद टी20 बल्लेबाज़ों में शामिल करती है।
FAQs
संजू सैमसन ने विराट कोहली से क्या सीखा?
अनुशासित लाइफस्टाइल और फिटनेस का महत्व।
संजू ने रैट रेस क्यों छोड़ी?
अपने तरीके से क्रिकेट खेलने के लिए।
टी20 विश्व कप में संजू ने कितने रन बनाए?
उन्होंने 321 रन बनाए।
प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट कौन बने?
संजू सैमसन।
2028 विश्व कप पर संजू का क्या कहना है?
वह भविष्य की चिंता नहीं करते।











