कोटला में बदली भारत की तैयारी, पाकिस्तान मुकाबले से पहले रणनीति में बदलाव के संकेत

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Abhishek Sharma

टी20 वर्ल्ड कप जैसे लंबे टूर्नामेंट में अगर गेंदबाज़ दो घंटे तक पूरी रफ्तार से नेट्स में पसीना बहाते दिखें, तो समझ लीजिए कि टीम कुछ खास सोच रही है। मंगलवार शाम अरुण जेटली स्टेडियम में ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला।

तेज़ गेंदबाज़ और स्पिनर अलग-अलग नेट्स में बंटे हुए थे। पिछले कुछ हफ्तों से सुर्खियों में रही बल्लेबाज़ी की आक्रामकता की जगह इस बार रोशनी गेंदबाज़ों पर थी। नामीबिया के खिलाफ मैच से दो दिन पहले इतनी तीव्रता से अभ्यास – यह संकेत था कि तैयारी सिर्फ उस मुकाबले के लिए नहीं है।

संकेत

भारत का असली इम्तिहान 15 फरवरी को कोलंबो में पाकिस्तान के खिलाफ है। प्रशासनिक और राजनीतिक अड़चनें हटने के बाद अब फोकस पूरी तरह क्रिकेट पर है।

सहायक कोच रयान टेन डोशेट ने साफ कहा कि भावनाएँ और राजनीति अपनी जगह हैं, लेकिन टीम को सिर्फ अपने खेल पर ध्यान देना है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पाकिस्तान पिछले दो हफ्तों से कोलंबो में खेल रहा है, इसलिए भारत को अपना सर्वश्रेष्ठ देना होगा।

यानी मुकाबला सिर्फ भावनात्मक नहीं, सामरिक भी है।

परिस्थितियाँ

अब तक टूर्नामेंट की पिचें बल्लेबाज़ों के लिए स्वर्ग नहीं रहीं। खासकर कोलंबो का प्रेमदासा स्टेडियम, जहां विकेट थोड़ी धीमी और सुस्त दिखी है।

भारत ने हाल के महीनों में 250+ स्कोर की मानसिकता अपनाई थी, लेकिन अब सोच में बदलाव की झलक दिख रही है। टेन डोशेट ने माना कि हर गेंद पर हमला करना हमेशा सही रास्ता नहीं होता। इसका मतलब साफ है — ऑल-आउट अटैक की जगह अब संतुलित और स्थिति के हिसाब से बल्लेबाज़ी पर ज़ोर हो सकता है।

आत्ममंथन

USA के खिलाफ जीत के बावजूद टीम मैनेजमेंट पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। गेंदबाज़ों से और सटीक प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।

जब आपके पास जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज, अर्शदीप सिंह और विविध स्पिन विकल्प मौजूद हों, तो अपेक्षाएँ भी ऊँची होंगी। अगर पिच 170-180 की है, तो 250 की मानसिकता छोड़नी ही पड़ेगी।

संयोजन

टीम कॉम्बिनेशन सबसे दिलचस्प पहलू बनकर उभरा है। वॉशिंगटन सुंदर, जो हाल ही में चोट से उबरे हैं, नेट्स में पूरी तरह सक्रिय दिखे।

चार ऑलराउंडर होने का मतलब है कि भारत पिच के अनुसार संयोजन बदल सकता है। अगर विकेट धीमी है तो अतिरिक्त स्पिन, अगर बल्लेबाज़ी गहराई चाहिए तो ऑलराउंड संतुलन – यही लचीलापन भारत की असली ताकत है।

ऊर्जा

लंबे टूर्नामेंट में खिलाड़ी आम तौर पर ऊर्जा बचाते हैं। लेकिन कोटला के नेट्स में दिखी तीव्रता ने संकेत दिया कि टीम अभी भी भूखी है। सिर्फ अभिषेक शर्मा, जो पेट की बीमारी से उबर रहे हैं, अभ्यास में शामिल नहीं हुए।

यह तैयारी किसी एक मैच की नहीं, बल्कि बड़े लक्ष्य की है।

भारत अब सिर्फ ताकत के दम पर नहीं, बल्कि हालात के हिसाब से खेलने की सोच रहा है। पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबला भावनाओं से कहीं आगे की चीज़ होगा — यह रणनीति, धैर्य और अनुकूलन की परीक्षा होगी।

अगर पिच धीमी रही तो समझदारी जीत सकती है।
अगर गेंदबाज़ धार में रहे तो बल्लेबाज़ों को खुलकर खेलने का मौका मिलेगा।

कोटला के नेट्स ने एक बात साफ कर दी है – अब सिर्फ रन बनाने का नहीं, सही समय पर सही फैसला लेने का दौर शुरू हो चुका है।

FAQs

भारत ने कोटला में किस पर ज्यादा फोकस किया?

गेंदबाज़ों ने पूरी तीव्रता से लंबा अभ्यास किया।

रणनीति में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?

टूर्नामेंट की पिचें अपेक्षा से धीमी और सुस्त हैं।

वॉशिंगटन सुंदर की भूमिका क्या हो सकती है?

पिच के अनुसार अतिरिक्त स्पिन और संतुलन देना।

पाकिस्तान मैच कब है?

15 फरवरी को कोलंबो में खेला जाएगा।

कोच ने गेंदबाज़ों पर क्या कहा?

उम्मीद है कि वे अभी से बेहतर प्रदर्शन करें।

Ehtesham Arif

I’m Ehtesham Arif, lead cricket analyst at Kricket Wala with over 3 years of experience in cricket journalism. I’m passionate about bringing you reliable match analysis and the latest updates from the world of cricket. My favorite team is India, and in the IPL, I support Delhi Capitals.

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