वेस्टइंडीज के महान ऑलराउंडर सर गारफील्ड सोबर्स को क्रिकेट इतिहास का सबसे बेहतरीन ऑलराउंडर माना जाता है। अपने करियर में उन्होंने बल्ले, गेंद और फील्डिंग तीनों विभागों में कई यादगार रिकॉर्ड बनाए। हालांकि 1971 में भारत के वेस्टइंडीज दौरे पर उनसे हुई तीन छोटी गलतियों ने भारतीय क्रिकेट को एक ऐसा सितारा दिया, जिसने आगे चलकर कई ऐतिहासिक उपलब्धियां अपने नाम कीं।
उस सीरीज में डेब्यू कर रहे सुनील गावस्कर को सर गारफील्ड सोबर्स ने तीन अलग-अलग मौकों पर जीवनदान दिया। बाद में गावस्कर ने अपनी आत्मकथा ‘Sunny Days’ और किताब ‘Idols’ में इन घटनाओं का विस्तार से जिक्र करते हुए बताया कि इन मौकों ने उनके करियर की दिशा बदल दी।
पहला जीवनदान
गावस्कर ने अपनी आत्मकथा में लिखा कि पहले टेस्ट के दौरान वह करीब 20 रन के स्कोर पर बल्लेबाजी कर रहे थे। वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज वैनबर्न होल्डर की गेंद उनके बल्ले का किनारा लेकर स्लिप में खड़े सर गारफील्ड सोबर्स की ओर गई, लेकिन सोबर्स वह कैच नहीं पकड़ सके।
गावस्कर ने लिखा कि यह उनके लिए बहुत बड़ा जीवनदान था। उन्होंने उस मौके का पूरा फायदा उठाया और 65 रन की अहम पारी खेली। यही वह मुकाबला था जिसमें भारत ने त्रिनिदाद में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपनी पहली टेस्ट जीत दर्ज की थी।
शतक से पहले बचाव
सीरीज के दौरान अपनी पहली टेस्ट सेंचुरी बनाते समय भी गावस्कर को सोबर्स की एक और चूक का फायदा मिला। जब वह 94 रन पर बल्लेबाजी कर रहे थे, तब ऑफ स्पिनर जैक नोरेइगा की गेंद उनके दस्तानों से लगकर स्लिप की दिशा में गई।
गावस्कर के अनुसार यदि सोबर्स अपनी सामान्य फील्डिंग पोजिशन पर खड़े होते तो यह आसान कैच हो सकता था। लेकिन बल्लेबाज के आगे बढ़कर खेलने की उम्मीद में वह पहले ही कुछ कदम आगे आ गए थे, जिससे गेंद उनके हाथ तक नहीं पहुंच सकी।
ओवर खत्म होने के बाद सोबर्स ने मुस्कुराते हुए गावस्कर से मजाक में कहा, “यार, तुम मेरे ही पीछे क्यों पड़े हो? कोई दूसरा फील्डर नहीं मिल सकता क्या?” यह उस सीरीज में तीसरी बार था जब सोबर्स उनसे कैच छोड़ चुके थे। इसके बाद गावस्कर ने शानदार 116 रन बनाकर अपने टेस्ट करियर का पहला शतक पूरा किया।
ऐतिहासिक प्रदर्शन
इन जीवनदानों का गावस्कर ने भरपूर फायदा उठाया और पूरी सीरीज में शानदार बल्लेबाजी की। आखिरी टेस्ट में उन्होंने 124 और 220 रन की यादगार पारियां खेलीं और पांच टेस्ट मैचों की सीरीज में कुल 774 रन बनाए।
आज भी यह रिकॉर्ड टेस्ट डेब्यू सीरीज में किसी भी बल्लेबाज द्वारा बनाए गए सबसे ज्यादा रन का विश्व रिकॉर्ड है। इस प्रदर्शन ने सुनील गावस्कर को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नई पहचान दिलाई और भारतीय क्रिकेट को एक ऐसा बल्लेबाज मिला, जिसने आने वाले वर्षों में कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाए।
सोबर्स का सम्मान
गावस्कर ने अपनी किताब में लिखा कि आखिरी टेस्ट समाप्त होने के बाद जब वह पवेलियन लौट रहे थे, तब सर गारफील्ड सोबर्स ने उनके सिर पर हाथ रखकर उनकी शानदार बल्लेबाजी की सराहना की। यह पल उनके लिए हमेशा यादगार बना रहा।
गावस्कर ने कई मौकों पर कहा है कि सोबर्स केवल महान खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि बेहद विनम्र और खेल भावना से भरपूर इंसान भी थे। विपक्षी खिलाड़ी की सफलता की खुले दिल से सराहना करना उनकी सबसे बड़ी खासियतों में से एक थी।
साथ भी खेले
1971-72 में सुनील गावस्कर और सर गारफील्ड सोबर्स रेस्ट ऑफ द वर्ल्ड टीम की ओर से ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक साथ भी खेले। उसी दौरे पर सोबर्स ने मेलबर्न में 254 रन की शानदार पारी खेली, जिसे सर डॉन ब्रैडमैन ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की सर्वश्रेष्ठ पारियों में से एक बताया था।
गावस्कर ने यह भी लिखा कि सोबर्स की निडर बल्लेबाजी उन्हें हमेशा प्रेरित करती थी। उन्होंने अपने पूरे करियर में तेज गेंदबाजों के खिलाफ कभी थाई गार्ड का इस्तेमाल नहीं किया, जो उनके आत्मविश्वास और साहस को दर्शाता है।
सबसे महान क्रिकेटर
अपनी पुस्तक ‘Idols’ में सुनील गावस्कर ने सर गारफील्ड सोबर्स को “अपने जीवन में देखा सबसे महान क्रिकेटर” बताया है। उनके अनुसार सोबर्स सिर्फ रिकॉर्ड बनाने वाले खिलाड़ी नहीं थे, बल्कि खेल भावना, विनम्रता और बहुमुखी प्रतिभा के ऐसे प्रतीक थे, जिनकी मिसाल क्रिकेट इतिहास में बहुत कम देखने को मिलती है।
1971 की वह टेस्ट सीरीज सिर्फ सुनील गावस्कर के शानदार डेब्यू के लिए ही नहीं, बल्कि सर गारफील्ड सोबर्स की खेल भावना और उदारता के लिए भी हमेशा याद की जाएगी। तीन छूटे हुए कैच भारतीय क्रिकेट के इतिहास का हिस्सा बन गए और उन्हीं मौकों ने एक ऐसे महान बल्लेबाज को जन्म दिया, जिसने आने वाले वर्षों में दुनिया भर के गेंदबाजों पर अपना दबदबा कायम किया।
FAQs
गारफील्ड सोबर्स ने गावस्कर का कितनी बार कैच छोड़ा था?
सोबर्स ने 1971 टेस्ट सीरीज में तीन बार गावस्कर का कैच छोड़ा था।
1971 सीरीज में गावस्कर ने कितने रन बनाए थे?
उन्होंने पांच टेस्ट में रिकॉर्ड 774 रन बनाए थे।
गावस्कर का पहला टेस्ट शतक कितना था?
उन्होंने 116 रन बनाकर पहला टेस्ट शतक लगाया था।
सोबर्स ने करियर में कितने टेस्ट खेले?
उन्होंने वेस्टइंडीज के लिए 93 टेस्ट मैच खेले।
गावस्कर ने सोबर्स को क्या बताया था?
उन्होंने सोबर्स को अपने जीवन का सबसे महान क्रिकेटर कहा था।











