रणजी ट्रॉफी चैंपियन जम्मू-कश्मीर, लोकल टैलेंट पर भरोसे की बड़ी जीत

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Ranji Trophy

जम्मू-कश्मीर क्रिकेट ने “वोकल फॉर लोकल” का मंत्र तब अपनाया, जब यह शब्द ट्रेंड में भी नहीं था। ताज़ा रणजी ट्रॉफी चैंपियन बनी टीम ने सालों से बाहरी खिलाड़ियों पर निर्भर रहने के बजाय अपने घरेलू टैलेंट पर भरोसा किया।

टीम के कप्तान Paras Dogra हिमाचल प्रदेश से हैं और गिने-चुने अपवादों में से एक हैं। बाकी स्क्वॉड लगभग पूरी तरह स्थानीय खिलाड़ियों से बना है।

प्रदेश पहचान

बारामूला, श्रीनगर और पुलवामा से लेकर जम्मू और डोडा तक, यह टीम पूरे प्रदेश की विविध प्रतिभा का प्रतिनिधित्व करती है। कश्मीर घाटी से तेज गेंदबाज और ऑलराउंडर उभरे, जबकि जम्मू से मजबूत बल्लेबाज़ सामने आए। डोडा जैसे इलाकों से युवा खिलाड़ी तेजी से आगे बढ़े।

रणनीति साफ

जम्मू-कश्मीर की सोच स्पष्ट रही है। बाहर से बड़े नाम लाने के बजाय अपने घर के सितारे तैयार करना। यही वजह है कि टीम की पहचान सिर्फ खिलाड़ियों से नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम से जुड़ गई है।

पूर्व ऑलराउंडर Sameeullah Beg मानते हैं कि प्रतिभा की कभी कमी नहीं थी। उनके मुताबिक असली चुनौती इंफ्रास्ट्रक्चर की थी, जिसे धीरे-धीरे बेहतर किया गया।

मैदान हकीकत

बेग बताते हैं कि एक समय जब उन्होंने सुविधाओं में सुधार की बात की, तो लोगों को यकीन नहीं हुआ। लेकिन श्रीनगर के ईदगाह मैदान में हर सुबह हजारों बच्चों को खेलते देखना इस बात का सबूत था कि जुनून की कमी नहीं है।

यह सिर्फ खेल नहीं, बल्कि एक आंदोलन जैसा था।

धीमी तैयारी

जम्मू-कश्मीर की सफलता अचानक नहीं आई। स्थानीय लीग को मजबूत किया गया। कोचिंग सुविधाएं बेहतर हुईं। जूनियर स्तर पर प्रतियोगिताएं बढ़ाई गईं। फिटनेस और तकनीक पर काम हुआ।

धीरे-धीरे टीम ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और अब वह चैंपियन बन चुकी है।

सही दिशा

पूर्व भारतीय स्पिनर Sunil Joshi ने कोच के रूप में टीम के पुनरुत्थान में अहम भूमिका निभाई। उनका मानना था कि खिलाड़ियों के पास भूख और प्रतिभा दोनों हैं, जरूरत सिर्फ सही मार्गदर्शन की है।

मेंटोरशिप और तकनीकी सुधार ने कच्ची प्रतिभा को मैच विनर में बदला।

मॉडल उदाहरण

जम्मू-कश्मीर का मॉडल अब दूसरे राज्यों के लिए भी मिसाल बन सकता है। चयन में स्थानीय खिलाड़ियों को प्राथमिकता, घरेलू अकादमी में निवेश और लंबी अवधि की सोच – यही इस सफलता का फॉर्मूला रहा।

यह कहानी बताती है कि मजबूत नींव पर ही बड़ी इमारत खड़ी होती है।

बड़ी जीत

रणजी ट्रॉफी की यह जीत सिर्फ एक खिताब नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और धैर्य की जीत है। जहां कभी संसाधनों की कमी थी, वहां अब उपलब्धियों की चमक दिखाई दे रही है।

जम्मू-कश्मीर ने साबित कर दिया है कि अगर जड़ों को सींचा जाए, तो शाखाएं खुद-ब-खुद आसमान छू लेती हैं।

FAQs

जम्मू-कश्मीर ने किस नीति पर भरोसा किया?

स्थानीय खिलाड़ियों पर।

रणजी जीत के कप्तान कौन थे?

पारस डोगरा।

मुख्य कमी क्या थी?

बुनियादी ढांचा।

सुनील जोशी की भूमिका क्या थी?

कोच और मार्गदर्शक।

ईदगाह मैदान क्यों प्रसिद्ध है?

हजारों युवा वहां अभ्यास करते हैं।

Ehtesham Arif

I’m Ehtesham Arif, lead cricket analyst at Kricket Wala with over 3 years of experience in cricket journalism. I’m passionate about bringing you reliable match analysis and the latest updates from the world of cricket. My favorite team is India, and in the IPL, I support Delhi Capitals.

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