सरांश जैन की भारतीय टेस्ट टीम तक पहुंचने की कहानी किसी अचानक मिले मौके या किस्मत का नतीजा नहीं है। यह करीब एक दशक की घरेलू मेहनत, लगातार सीखने की आदत और Red-Ball Cricket के प्रति गहरे जुनून की कहानी है। 2024 के IPL के बाद जब उन्होंने कोलकाता नाइट राइडर्स के कोच चंद्रकांत पंडित से बात की, तो अपनी प्राथमिकता बिल्कुल साफ कर दी थी।
सरांश ने बताया कि वह हमेशा नेट गेंदबाज बनकर नहीं रहना चाहते और उनका सपना भारत के लिए Test Cricket खेलना है। आज जब वह भारतीय टीम तक पहुंच चुके हैं, तो उनकी यह सोच और भी खास नजर आती है, क्योंकि उन्होंने उस दौर में लंबा रास्ता चुना जब T20 Cricket युवा खिलाड़ियों को तेजी से पहचान और बड़े अवसर दे रहा है।
पहचान
IPL 2024 के दौरान KKR ने सरांश को नेट्स में गेंदबाजी के लिए बुलाया था। करीब डेढ़ महीने तक उन्होंने टीम के बल्लेबाजों को गेंदबाजी की, लेकिन उनके मन में लगातार एक बात चल रही थी कि उन्हें अपने करियर की दिशा तय करनी है। इसके बाद उन्होंने चंद्रकांत पंडित से साफ कहा कि अगर नीलामी में कोई टीम उन्हें चुनती है तो वह खुश होंगे, लेकिन वह सिर्फ नेट गेंदबाज बनकर नहीं रहना चाहते। पंडित के मुताबिक सरांश का लक्ष्य भारत के लिए Red-Ball Cricket खेलना था और उन्हें डर था कि अगर वह लगातार White-Ball Cricket में ही व्यस्त रहे तो उनका टेस्ट सपना पीछे छूट सकता है।
बदलाव
जब चंद्रकांत पंडित ने 2020 में मध्य प्रदेश की रणजी टीम की कमान संभाली, तब सरांश अभी नियमित खिलाड़ी नहीं थे। हालांकि पंडित ने उनकी गेंदबाजी में ऐसी खूबियां देखीं जो उन्हें बाकी स्पिनरों से अलग करती थीं। आधुनिक White-Ball Cricket में स्पिनरों से अक्सर तेज और सपाट गेंदबाजी की उम्मीद की जाती है, लेकिन सरांश गेंद को हवा में ज्यादा काम कराने पर भरोसा करते हैं।
उनकी गेंद में Dip और Drift दिखाई देती है, जबकि उनका एक्शन काफी शांत रहता है। रन-अप और Delivery Stride में कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आता, लेकिन गेंद हाथ से निकलते समय वह पर्याप्त Revolutions हासिल करती है। यही बारीकी पंडित को सबसे ज्यादा प्रभावित करती थी।
सरांश के शुरुआती दिन हालांकि आसान नहीं रहे। पर्याप्त मैच खेलने का मौका नहीं मिलने से उनका आत्मविश्वास प्रभावित हुआ और उन्हें खुद पर भी सवाल होने लगे थे। पंडित ने उस दौर में उन्हें भरोसा दिया और धीरे-धीरे सरांश को अपनी क्षमता दिखाने के मौके मिलने लगे। इसका सबसे बड़ा असर 2021-22 रणजी ट्रॉफी के Knockout चरण में दिखाई दिया, जहां उन्होंने क्वार्टरफाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल में कुल 13 विकेट हासिल किए। इसके बाद उनकी घरेलू क्रिकेट यात्रा ने तेजी पकड़ ली और वह लगातार मध्य प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण गेंदबाज बनते गए।
| Season | Matches | Wickets |
|---|---|---|
| 2022-23 | 8 | 35 |
| 2023-24 | 8 | 27 |
| 2024-25 | 7 | 21 |
| 2025-26 | 7 | 30 |
भारत के लिए टेस्ट पदार्पण से पहले सरांश 54 First-Class Matches में 188 विकेट हासिल कर चुके थे। यह आंकड़ा बताता है कि उनकी भारतीय टीम तक पहुंच सिर्फ किसी एक शानदार सीजन का परिणाम नहीं है। उन्होंने कई वर्षों तक लगातार Red-Ball Cricket खेलकर खुद को इस स्तर के लिए तैयार किया है।
कोण
सरांश की गेंदबाजी में एक अहम बदलाव चंद्रकांत पंडित की सलाह से आया। पंडित ने उन्हें Round the Wicket गेंदबाजी करने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में सरांश इसके लिए पूरी तरह सहज नहीं थे, क्योंकि एक ऑफ-स्पिनर के लिए इस कोण से गेंदबाजी करने पर LBW के मौके कम होने की चिंता रहती है। लेकिन पंडित ने उन्हें प्रयोग करने की आजादी दी और धीरे-धीरे यह तरीका सरांश की गेंदबाजी की खास पहचान बन गया।
दाएं हाथ के बल्लेबाजों के खिलाफ इस कोण से उन्होंने LBW के विकल्प को भी मजबूत किया। पिछले साल दलीप ट्रॉफी फाइनल में उन्होंने रिकी भुई को इसी तरीके से LBW किया था और उस मैच में पांच विकेट भी हासिल किए। यह बदलाव दिखाता है कि सरांश अपनी पुरानी तकनीक से चिपके रहने के बजाय जरूरत के हिसाब से अपने खेल में बदलाव करने के लिए तैयार रहते हैं।
सोच
सरांश की सबसे बड़ी ताकत शायद उनकी ऑफ-स्पिन नहीं, बल्कि क्रिकेट को समझने की भूख है। चंद्रकांत पंडित के मुताबिक वह लगातार सवाल पूछते रहते थे कि किसी बल्लेबाज को किस लंबाई पर गेंद करनी चाहिए, किस खिलाड़ी को किस तरह आउट किया जा सकता है और Field Placement कैसी होनी चाहिए। यही जिज्ञासा आगे चलकर उन्हें नई गेंद से गेंदबाजी करने जैसे प्रयोगों तक भी ले गई।
सरांश केवल गेंद फेंकने वाले खिलाड़ी नहीं बनना चाहते थे, बल्कि वह यह समझना चाहते थे कि किसी गेंद को एक खास जगह पर क्यों फेंका जा रहा है। Test Cricket में यह सोच बेहद उपयोगी हो सकती है, क्योंकि यहां एक बल्लेबाज के खिलाफ सिर्फ एक या दो ओवर की योजना नहीं बनानी होती, बल्कि कई घंटों तक उसी योजना को बदलते हुए लागू करना पड़ता है।
बल्लेबाजी
सरांश ने अपनी बल्लेबाजी को भी नजरअंदाज नहीं किया। निचले क्रम में उपयोगी योगदान देने के लिए उन्होंने अपनी Batting Technique पर लगातार काम किया है। 2021-22 रणजी ट्रॉफी फाइनल में उन्होंने पहली पारी में अर्धशतक लगाया था, जबकि हाल ही में श्रीलंका दौरे पर India A के लिए दूसरे अनौपचारिक टेस्ट में उन्होंने नाबाद 70 रन की पारी खेली।
पंडित ने उनकी बल्लेबाजी की एक कमजोरी भी पहचानी थी। सरांश को Off-Stump के बाहर Cut Shot खेलना काफी पसंद था और Red-Ball Cricket में कई बार इसी शॉट के कारण उन्होंने अपना विकेट गंवाया। पिछले सीजन उन्होंने इस शॉट को पूरी तरह छोड़ने पर काम किया। यह बदलाव छोटा जरूर था, लेकिन इससे उनकी सोच साफ दिखाई देती है कि कमजोरी सामने आए तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय उस पर लगातार काम किया जाए।
मौका
सरांश का Test Debut ऐसे समय हुआ जब भारत को 20 विकेट लेने के लिए अपने Bowling Options को मजबूत करने की जरूरत थी। कुलदीप यादव को नरम कूकाबुरा गेंद के साथ नियंत्रण हासिल करने में कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ा, जबकि श्रीलंका ने अपनी Batting Line-up में एक और बाएं हाथ के बल्लेबाज को शामिल किया। ऐसे में सरांश का पारंपरिक ऑफ-स्पिन भारत को एक अलग तरह का विकल्प देता है।
उनका First-Class Record, बल्लेबाजी में सुधार और Red-Ball Cricket के प्रति समर्पण उन्हें सिर्फ एक अतिरिक्त स्पिनर नहीं बनाता। वह ऐसे गेंदबाज हैं जो बल्लेबाज को हवा में हराने के साथ-साथ लंबे स्पेल में लगातार दबाव बनाने की कोशिश करते हैं। यही गुण Test Cricket में उन्हें उपयोगी बना सकता है, जहां धैर्य, नियंत्रण और लगातार सही जगह गेंद डालना किसी भी स्पिनर की सबसे बड़ी ताकत होती है।
सरांश जैन की कहानी यह भी बताती है कि हर युवा क्रिकेटर का रास्ता IPL की चमक से होकर नहीं गुजरता। कुछ खिलाड़ी शांत तरीके से घरेलू क्रिकेट में अपनी कला को निखारते रहते हैं और लंबे प्रारूप को अपनी पहली प्राथमिकता बनाते हैं। सरांश ने भी यही रास्ता चुना। अब वर्षों की मेहनत के बाद भारतीय Test Jersey उनके सामने है और जिस लाल गेंद को उन्होंने हमेशा अपने करियर का अहम हिस्सा माना, वही अब उनके सपने की सबसे बड़ी परीक्षा लेने वाली है।










