वैभव सूर्यवंशी को लेकर गांगुली की दो टूक राय, भविष्य उज्ज्वल लेकिन टेस्ट के लिए अभी इंतजार जरूरी

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Sourav Ganguly

भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि युवा टैलेंट को लेकर उत्साह जरूरी है, लेकिन जल्दबाजी नुकसानदायक हो सकती है। टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए गए इंटरव्यू में गांगुली ने घरेलू क्रिकेट, चयन नीति, वैभव सूर्यवंशी के भविष्य, ऋषभ पंत की भूमिका और T20 क्रिकेट के बदलते स्वरूप पर विस्तार से बात की। उनके विचारों में अनुभव और संतुलन साफ नजर आया।

गांगुली का मानना है कि क्रिकेट में केवल प्रतिभा देखना काफी नहीं होता। किसी खिलाड़ी को कब, कहां और किस फॉर्मेट में मौका देना है, यह फैसला उतना ही महत्वपूर्ण होता है। यही बात उन्होंने खास तौर पर भारत के सबसे चर्चित युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी को लेकर कही।

चयन

घरेलू क्रिकेट और चयन प्रक्रिया पर बात करते हुए गांगुली ने रणजी ट्रॉफी के महत्व को दोहराया। उन्होंने कहा कि जो खिलाड़ी फर्स्ट क्लास क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हैं, उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। गांगुली के मुताबिक, रणजी ट्रॉफी में प्रभावशाली गेंदबाज़ी करने वाले आकिब नबी को अफगानिस्तान सीरीज के लिए भारतीय टीम में शामिल किया जाना चाहिए था।

हालांकि उन्होंने यह भी माना कि तेज़ गेंदबाज़ प्रिंस यादव को मौका देना पूरी तरह गलत फैसला नहीं था। गांगुली ने कहा कि अगर किसी युवा गेंदबाज़ के पास असाधारण रफ्तार और क्षमता है, तो उसे लंबे समय तक घरेलू क्रिकेट में रोकना भी हमेशा सही नहीं होता। आदर्श स्थिति यही होती कि चयनकर्ताओं के पास दोनों खिलाड़ियों को आज़माने की गुंजाइश होती।

वैभव

IPL 2026 में 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने जिस तरह का प्रदर्शन किया, उसने पूरे क्रिकेट जगत का ध्यान खींचा है। इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर के गेंदबाज़ों के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाज़ी करना असाधारण माना जा रहा है। लेकिन गांगुली इस बात को लेकर साफ हैं कि टेस्ट क्रिकेट के लिए अभी वैभव को समय देना जरूरी है।

उनके अनुसार, वैभव को T20 क्रिकेट में मौके दिए जा सकते हैं, लेकिन टेस्ट टीम में शामिल करने से पहले उन्हें फर्स्ट क्लास क्रिकेट में निरंतर रन बनाने होंगे। गांगुली ने कहा कि लंबा फॉर्मेट तकनीक, धैर्य और मानसिक मजबूती की परीक्षा होता है, जो समय के साथ विकसित होती है।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि वैभव भारत के भविष्य हैं। गांगुली के शब्दों में, 15 साल की उम्र में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ों के खिलाफ इस तरह खेल पाना बहुत बड़ी बात है। लेकिन भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए सही रास्ता अपनाना जरूरी है, न कि शॉर्टकट।

पंत

ऋषभ पंत को लेकर गांगुली का नजरिया संतुलित और व्यावहारिक रहा। उन्होंने माना कि T20 क्रिकेट में पंत की निरंतरता पर सवाल उठे हैं, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उनकी गुणवत्ता पर कोई शक नहीं है।

गांगुली ने कहा कि पंत एक वर्ल्ड क्लास टेस्ट बल्लेबाज़ हैं और उनका रिकॉर्ड यह साबित करता है। T20 फॉर्मेट में वह अब भी अपने खेल को ढालने की प्रक्रिया में हैं, जो इस फॉर्मेट की तेजी को देखते हुए स्वाभाविक है।

कप्तानी को लेकर गांगुली ने साफ कहा कि यह जिम्मेदारी हर खिलाड़ी पर दबाव डालती है। अगर कोई खिलाड़ी कप्तान बनना चाहता है, तो उसे उस अतिरिक्त जिम्मेदारी के साथ अपने प्रदर्शन को भी संतुलित रखना आना चाहिए। यह संतुलन नहीं बना तो टीम प्रबंधन को अन्य विकल्पों पर विचार करना पड़ता है।

कप्तानी

गांगुली के विचारों से यह साफ संकेत मिलता है कि कप्तानी सिर्फ नाम या पद का सवाल नहीं है। यह मैदान पर और मैदान के बाहर फैसले लेने की क्षमता की परीक्षा होती है। उन्होंने इशारों में कहा कि कप्तान को यह समझना होता है कि कब नेतृत्व टीम को ऊपर उठाता है और कब वह खिलाड़ी के अपने खेल पर असर डालने लगता है।

उनके अनुसार, कप्तानी की जिम्मेदारी लेने का मतलब है कि खिलाड़ी को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा, क्योंकि टीम के नतीजे अक्सर कप्तान के फैसलों से जोड़े जाते हैं।

बदलाव

T20 क्रिकेट के बढ़ते प्रभाव पर गांगुली ने माना कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि यह फॉर्मेट इतना बड़ा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि वह, राहुल द्रविड़ और सचिन तेंदुलकर ही नहीं, बल्कि रिकी पोंटिंग, कुमार संगकारा, जो रूट और एलिस्टर कुक जैसे खिलाड़ी भी एक अलग दौर में पले-बढ़े हैं।

गांगुली के मुताबिक, हर पीढ़ी का क्रिकेट अलग होता है। समय के साथ खेल बदलता है और खिलाड़ियों को भी उसी के अनुसार खुद को ढालना पड़ता है। क्रिकेट में कुछ भी स्थायी नहीं है, और यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है।

T20

गांगुली ने स्वीकार किया कि T20 क्रिकेट अब क्रिकेट की स्थायी संरचना का हिस्सा बन चुका है। यह फॉर्मेट ऐसे खिलाड़ियों को लगातार आगे लाता रहेगा जो निडर होकर खेलते हैं और बड़े शॉट्स लगाने में भरोसा रखते हैं।

उनका मानना है कि T20 क्रिकेट सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि नए तरह के टैलेंट को पहचानने का मंच भी है। यह उन आलोचनाओं का जवाब भी है जो कहते हैं कि यह फॉर्मेट तकनीक को नुकसान पहुंचाता है।

सौरव गांगुली की बातों में जल्दबाजी के बजाय धैर्य पर जोर साफ दिखाई देता है। वह युवा खिलाड़ियों के समर्थक हैं, लेकिन उन्हें हर फॉर्मेट में तुरंत उतारने के पक्ष में नहीं हैं। वैभव सूर्यवंशी उनके लिए भारत का भविष्य हैं, लेकिन उस भविष्य को मजबूत बनाने के लिए सही समय और सही मंच जरूरी है।

घरेलू क्रिकेट की भूमिका, कप्तानी का दबाव और T20 क्रिकेट का प्रभाव – इन सभी मुद्दों पर गांगुली का संदेश एक ही है। टैलेंट जरूरी है, लेकिन संतुलन, धैर्य और सही फैसले उससे भी ज्यादा अहम हैं।

FAQs

क्या वैभव सूर्यवंशी टेस्ट क्रिकेट के लिए तैयार हैं?

नहीं, गांगुली के अनुसार उन्हें और फर्स्ट क्लास रन चाहिए।

गांगुली ने वैभव को किस फॉर्मेट में खेलने लायक माना?

T20 क्रिकेट में तुरंत खेलने लायक माना।

ऋषभ पंत को लेकर गांगुली की राय क्या है?

टेस्ट में वर्ल्ड क्लास, T20 में संघर्षरत।

क्या गांगुली चयन प्रक्रिया से सहमत हैं?

आंशिक रूप से, दोनों खिलाड़ियों को मौका मिलना चाहिए था।

T20 क्रिकेट पर गांगुली का क्या कहना है?

T20 क्रिकेट यहां रहने वाला है।

Ehtesham Arif

I’m Ehtesham Arif, lead cricket analyst at Kricket Wala with over 3 years of experience in cricket journalism. I’m passionate about bringing you reliable match analysis and the latest updates from the world of cricket. My favorite team is India, and in the IPL, I support Delhi Capitals.

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