Team India में जगह बनाना किसी भी युवा क्रिकेटर के लिए बड़ी उपलब्धि होती है, लेकिन टीम में शामिल होने के बाद भी Playing XI में मौका न मिलना किसी खिलाड़ी के लिए निराशाजनक हो सकता है।
15 साल के Vaibhav Sooryavanshi के साथ भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से पहचान बनाने वाले इस युवा खिलाड़ी को हाल ही में West Indies के खिलाफ पांच मैचों की T20I सीरीज में एक भी मुकाबला खेलने का मौका नहीं मिला।
अब पूर्व भारतीय ओपनर Aakash Chopra ने Sooryavanshi को लेकर अहम सुझाव दिया है। उनका मानना है कि अगर टीम मैनेजमेंट इस युवा बल्लेबाज को Playing XI में जगह नहीं दे पा रहा है, तो उसे स्क्वॉड में बैठाए रखने के बजाय Ranji Trophy खेलने के लिए रिलीज करने पर विचार करना चाहिए। Chopra ने यह भी कहा कि टीम के टॉप ऑर्डर में पहले से ही कई बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं, जिसकी वजह से Sooryavanshi के लिए जगह बनाना आसान नहीं है।
मौका मिलना मुश्किल
Vaibhav Sooryavanshi को आगामी पांच मैचों की T20I सीरीज के लिए भी भारतीय टीम में शामिल किया गया है। भारत और New Zealand के बीच यह सीरीज 22 नवंबर से शुरू होनी है। हालांकि, West Indies के खिलाफ पिछली घरेलू सीरीज में उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला था। यह सीरीज 2-2 से बराबर रही थी।
Aakash Chopra के मुताबिक, Sooryavanshi को मौका न मिलने की सबसे बड़ी वजह उनकी प्रतिभा की कमी नहीं, बल्कि Playing XI में जगह का अभाव है। भारतीय टीम के टॉप ऑर्डर में Sanju Samson, Abhishek Sharma और Ishan Kishan जैसे बल्लेबाज मौजूद हैं। जब ये खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हों, तो किसी युवा खिलाड़ी के लिए उनकी जगह लेना मुश्किल हो जाता है।
Chopra ने अपने YouTube चैनल पर इस मुद्दे पर बात करते हुए कहा कि Sooryavanshi को खिलाने के लिए आखिर किस खिलाड़ी को बाहर किया जाए? उनके मुताबिक, मौजूदा हालात में Sooryavanshi को इन टॉप ऑर्डर बल्लेबाजों में से किसी एक की जगह ही मौका दिया जा सकता है।
रोटेशन का सुझाव
Aakash Chopra का मानना है कि टीम मैनेजमेंट बल्लेबाजों को रोटेट करके Sooryavanshi को खेलने का अवसर दे सकता है। इससे टीम के सभी खिलाड़ियों को मौका मिलेगा और युवा बल्लेबाज को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी क्षमता दिखाने का समय भी मिलेगा।
उन्होंने कहा कि जब तीन खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हों, तो किसी चौथे खिलाड़ी के लिए अचानक जगह बनाना आसान नहीं होता। Chopra ने स्वीकार किया कि युवा खिलाड़ी को लगातार बेंच पर बैठे देखना निराशाजनक है, लेकिन मौजूदा टीम कॉम्बिनेशन में दूसरा रास्ता निकालना मुश्किल दिखाई देता है।
उनका सुझाव है कि टीम मैनेजमेंट Sanju Samson, Abhishek Sharma, Ishan Kishan और Vaibhav Sooryavanshi को रोटेशन के आधार पर मौका दे सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि उनके इस विचार को ज्यादा समर्थन नहीं मिल रहा है।
Sooryavanshi के लिए यह स्थिति इसलिए भी अहम है, क्योंकि उन्हें टीम में शामिल तो किया जा रहा है, लेकिन लगातार खेलने का मौका नहीं मिल रहा। किसी युवा खिलाड़ी के लिए सिर्फ टीम के साथ रहना ही नहीं, बल्कि मैदान पर उतरकर अनुभव हासिल करना भी जरूरी होता है।
Ranji Trophy खेलने की सलाह
Chopra ने एक और महत्वपूर्ण बात कही। उनके मुताबिक, अगर Sooryavanshi को पूरी सीरीज के दौरान Playing XI में जगह मिलने की संभावना नहीं है, तो उन्हें टीम से रिलीज करके Ranji Trophy खेलने का मौका दिया जाना चाहिए।
रणजी ट्रॉफी भारत का प्रमुख घरेलू First-class टूर्नामेंट है, जहां खिलाड़ियों को लंबे प्रारूप में अपनी तकनीक और धैर्य को बेहतर बनाने का अवसर मिलता है। Sooryavanshi जैसे युवा बल्लेबाज के लिए घरेलू क्रिकेट में लगातार मैच खेलना उपयोगी हो सकता है, खासकर तब जब अंतरराष्ट्रीय टीम में उन्हें खेलने का मौका नहीं मिल रहा हो।
हालांकि, T20 क्रिकेट में Sooryavanshi का शुरुआती प्रदर्शन काफी प्रभावशाली रहा है। उन्होंने आठ T20I मुकाबलों में 246 रन बनाए हैं और उनका Strike Rate 186 से अधिक रहा है। इस दौरान उनके बल्ले से दो अर्धशतक भी निकले हैं।
ये आंकड़े बताते हैं कि Sooryavanshi तेजी से रन बनाने की क्षमता रखते हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय टीम में जगह पक्की करने के लिए उन्हें लगातार अवसर और अपने प्रदर्शन को आगे बढ़ाने का मौका मिलना भी जरूरी है।
Tilak Varma का बचाव
Aakash Chopra ने इस चर्चा के दौरान Tilak Varma का भी बचाव किया। कुछ लोगों का मानना है कि Tilak की निरंतरता में कमी आई है और उनकी जगह Sooryavanshi को टीम में शामिल किया जा सकता है। लेकिन Chopra इस सोच से सहमत नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि Tilak Varma के प्रदर्शन को सिर्फ हाल के कुछ मैचों के आधार पर नहीं आंकना चाहिए। Tilak ने जब नंबर तीन पर बल्लेबाजी की थी, तब दो शतक लगाए थे। इसके बाद उन्हें चोट लगी और World Cup से पहले भी उन्हें कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ा।
Chopra के मुताबिक, Tilak की भूमिका में बदलाव आने के बाद उनके प्रदर्शन को समझना और भी जरूरी हो जाता है। जब से उन्हें फिनिशर की भूमिका दी गई है, तब से उन्होंने मिडिल ऑर्डर और लोअर मिडिल ऑर्डर में अच्छा योगदान दिया है।
उन्होंने Asian Games के प्रदर्शन का भी जिक्र किया और कहा कि Tilak को लगातार खराब प्रदर्शन करने वाला खिलाड़ी बताना सही नहीं है। उनके मुताबिक, Tilak ने अलग-अलग बल्लेबाजी क्रम पर टीम के लिए योगदान दिया है, इसलिए सिर्फ Sooryavanshi को मौका देने के लिए उन पर सवाल उठाना उचित नहीं होगा।
टीम के सामने मुश्किल फैसला
भारतीय टीम मैनेजमेंट के सामने इस समय दो अलग-अलग जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। एक तरफ Sooryavanshi जैसे युवा खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभव देने की जरूरत है, तो दूसरी तरफ टीम के मौजूदा बल्लेबाजों ने अच्छा प्रदर्शन किया है और उन्हें बिना ठोस वजह बाहर करना आसान नहीं है।
अगर Sooryavanshi को लगातार स्क्वॉड में रखा जाता है, लेकिन खेलने का मौका नहीं मिलता, तो उनके लिए घरेलू क्रिकेट में समय बिताना एक विकल्प हो सकता है। दूसरी ओर, बल्लेबाजों को रोटेट करने की रणनीति अपनाकर टीम उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आजमा सकती है।
फिलहाल Aakash Chopra की सलाह ने इस बहस को फिर से चर्चा में ला दिया है कि युवा खिलाड़ियों को टीम में शामिल करने के बाद उन्हें खेलने के अवसर भी मिलने चाहिए। Sooryavanshi के T20I आंकड़े उनकी क्षमता की झलक देते हैं, लेकिन उनका अगला कदम इस बात पर निर्भर करेगा कि टीम मैनेजमेंट उन्हें कब और किस भूमिका में मौका देता है।
एक बात साफ है कि Vaibhav Sooryavanshi को लेकर चर्चा उनकी प्रतिभा पर सवाल उठाने से ज्यादा उन्हें सही अवसर देने की है। अब देखना होगा कि New Zealand के खिलाफ आगामी T20I सीरीज में उन्हें Playing XI में जगह मिलती है या वह एक बार फिर बेंच पर बैठते नजर आते हैं।










