इंग्लैंड दौरे पर पाकिस्तान क्रिकेट टीम की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। लॉर्ड्स टेस्ट की पहली पारी में पाकिस्तान की पूरी टीम सिर्फ 110 रन पर सिमट गई, जिसके बाद पूर्व इंग्लिश कप्तान माइकल वॉन ने टीम की बल्लेबाजी पर बेहद तीखी टिप्पणी की। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि पहले टेस्ट में पारी और 53 रन से मिली हार के बाद लॉर्ड्स में टीम बेहतर प्रदर्शन करेगी, लेकिन पहली पारी में बल्लेबाजों के खराब प्रदर्शन ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए।
इंग्लैंड के गेंदबाजों के सामने पाकिस्तान का शीर्ष क्रम ज्यादा देर तक टिक नहीं सका और पूरी टीम 38 ओवर के अंदर ही पवेलियन लौट गई। ऐसे प्रदर्शन के बाद वॉन ने कहा कि इंग्लैंड के गेंदबाजों को पाकिस्तान की बल्लेबाजी से किसी गंभीर चुनौती का सामना नहीं करना पड़ रहा है।
पतन
लॉर्ड्स टेस्ट से पहले पाकिस्तान को उम्मीद थी कि नियमित कप्तान बाबर आजम की वापसी से टीम की बल्लेबाजी मजबूत होगी। हालांकि, बाबर भी इस मौके का फायदा नहीं उठा सके और सिर्फ 8 रन बनाकर आउट हो गए। अब्दुल्लाह शफीक ने 5 रन, शान मसूद ने 1 रन और मोहम्मद रिजवान ने 7 रन बनाए, जिससे पाकिस्तान का शीर्ष क्रम शुरुआत में ही बिखर गया।
अजान अवैस ने 46 रन बनाकर कुछ resistance दिखाने की कोशिश की और टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाने की उम्मीद जगाई, लेकिन उन्हें दूसरे छोर से पर्याप्त साथ नहीं मिला। नतीजा यह रहा कि पाकिस्तान की पूरी पारी 110 रन पर समाप्त हो गई। लॉर्ड्स जैसी परिस्थितियों में नई गेंद के सामने बल्लेबाजी करना चुनौतीपूर्ण जरूर होता है, लेकिन टेस्ट स्तर की टीम से उम्मीद की जाती है कि वह मुश्किल समय में विकेट बचाकर पारी को संभालने की कोशिश करे। पाकिस्तान इस मोर्चे पर पूरी तरह विफल नजर आया।
वॉन
माइकल वॉन ने BBC Test Match Special पर पाकिस्तान की बल्लेबाजी को लेकर अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की। उन्होंने कहा कि इंग्लैंड के गेंदबाजों को पाकिस्तान के बल्लेबाजों से बिल्कुल चुनौती नहीं मिल रही है और वे बिना किसी डर के अपनी योजना के मुताबिक गेंदबाजी कर पा रहे हैं। वॉन के मुताबिक, पाकिस्तान की मौजूदा batting line-up उन सबसे आसान लाइन-अप में से एक दिखाई दे रही है, जिसका सामना उन्होंने लंबे समय में देखा है।
उनका मानना है कि इंग्लैंड का हर गेंदबाज विकेट हासिल करने के लिए उत्सुक नजर आ रहा है, क्योंकि पाकिस्तान की बल्लेबाजी में फिलहाल ऐसा कोई खिलाड़ी दिखाई नहीं दे रहा जो गेंदबाजों पर दबाव डाल सके या उनकी गेंदबाजी के आंकड़ों को बिगाड़ सके। टेस्ट क्रिकेट में अगर बल्लेबाज गेंदबाज को लगातार दबाव में नहीं डालता, तो गेंदबाज को अपने क्षेत्रों में गेंद डालने और लगातार attacking field के साथ विकेट लेने का मौका मिलता रहता है।
टिप्पणी
वॉन की सबसे कठोर टिप्पणी तब सामने आई जब उन्होंने पाकिस्तान की बल्लेबाजी के स्तर की तुलना सेकंड डिविजन काउंटी क्रिकेट से कर दी। उन्होंने इंग्लैंड के गेंदबाजी आक्रमण की तारीफ करते हुए कहा कि अगर यही गेंदबाज इसी तरह की consistency के साथ गेंदबाजी करते रहे, तो वे बेहतर बल्लेबाजी क्रम के सामने भी काफी परेशानी खड़ी कर सकते हैं। लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ लगातार विकेट मिलने से इंग्लैंड के गेंदबाजों का काम और आसान हो गया है।
पाकिस्तान के बल्लेबाजों ने कई मौकों पर गेंद को शरीर से दूर खेला, दबाव में गलत शॉट लगाए और अपनी विकेट गंवा दी। वॉन की टिप्पणी निश्चित रूप से काफी सख्त है, लेकिन पाकिस्तान के पहली पारी के आंकड़े इस आलोचना को और ज्यादा चर्चा में ला देते हैं। सिर्फ 110 रन पर पूरी टीम का आउट होना इस बात का संकेत है कि टीम को विदेशी परिस्थितियों में अपनी batting approach पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
बाबर
बाबर आजम की वापसी को पाकिस्तान के लिए लॉर्ड्स टेस्ट से पहले एक बड़ा positive माना जा रहा था। अनुभवी बल्लेबाज से उम्मीद थी कि वह मुश्किल परिस्थितियों में पारी को संभालेंगे और बाकी बल्लेबाजों को भी confidence देंगे। लेकिन बाबर सिर्फ 8 रन बनाकर आउट हो गए और उनकी जल्दी dismissal ने पाकिस्तान की परेशानी और बढ़ा दी।
विदेशी परिस्थितियों में किसी भी टीम को अपने अनुभवी top-order बल्लेबाजों से बड़ी पारियों की उम्मीद रहती है, क्योंकि शुरुआती विकेट गिरने के बाद middle और lower order पर दबाव तेजी से बढ़ जाता है। बाबर की वापसी के बावजूद पाकिस्तान का शीर्ष क्रम इंग्लैंड के गेंदबाजों के सामने टिक नहीं पाया। अगर पाकिस्तान को टेस्ट क्रिकेट में लगातार बेहतर प्रदर्शन करना है, तो बाबर समेत उसके अनुभवी बल्लेबाजों को मुश्किल परिस्थितियों में लंबी पारियां खेलने की जिम्मेदारी उठानी होगी।
इंग्लैंड
पाकिस्तान के सिर्फ 110 रन पर आउट होने के बाद इंग्लैंड ने मैच पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली। दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक इंग्लैंड अपनी दूसरी पारी में 81/3 तक पहुंच चुका था और उसकी कुल बढ़त 261 रन हो गई थी। इसका मतलब था कि पाकिस्तान पर मैच में वापसी करने के लिए बेहद बड़ा दबाव आ चुका था। इंग्लैंड के गेंदबाजों ने पहली पारी में जिस तरह पाकिस्तानी बल्लेबाजों को लगातार गलतियां करने के लिए मजबूर किया, उससे मेजबान टीम को मनोवैज्ञानिक बढ़त भी मिली।
दूसरी तरफ इंग्लैंड के बल्लेबाजों के पास अब स्कोर को और बड़ा करने और पाकिस्तान को मैच से पूरी तरह बाहर करने का अवसर था। ऐसी स्थिति में पाकिस्तान के गेंदबाजों को भी लंबे spells में धैर्य बनाए रखते हुए विकेट निकालने होंगे, लेकिन टीम की सबसे बड़ी समस्या अभी भी उसकी batting ही बनी हुई है।
चोट
पाकिस्तान की मुश्किलों को इमाम-उल-हक की चोट ने भी बढ़ा दिया। फील्डिंग के दौरान पिंडली में चोट लगने के कारण वह पाकिस्तान की पहली पारी में बल्लेबाजी के लिए नहीं उतर सके। इमाम की गैरमौजूदगी से पाकिस्तान के top order में अनुभव की कमी और ज्यादा महसूस हुई। जब टीम पहले ही अपने शुरुआती बल्लेबाजों के विकेट जल्दी गंवा रही हो, तब एक अनुभवी बल्लेबाज का उपलब्ध न होना स्थिति को और मुश्किल बना देता है।
हालांकि, टेस्ट क्रिकेट में परिस्थितियां कभी भी आसान नहीं होतीं और अच्छी टीमों से उम्मीद की जाती है कि वे चोट या किसी अन्य परेशानी के बावजूद अपने available resources का बेहतर इस्तेमाल करें। पाकिस्तान के लिए भी यही चुनौती थी, लेकिन 110 रन का स्कोर बताता है कि टीम इस मुश्किल स्थिति से निकलने का रास्ता नहीं खोज सकी।
जवाब
अब पाकिस्तान के सामने सिर्फ लॉर्ड्स टेस्ट को बचाने की चुनौती नहीं है, बल्कि अपनी batting credibility को दोबारा साबित करने का सवाल भी है। पहले टेस्ट में पारी और 53 रन से हारने के बाद दूसरे टेस्ट की पहली पारी में सिर्फ 110 रन पर सिमटना टीम के लिए गंभीर warning है। इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम के खिलाफ विदेश में खेलने के लिए सिर्फ प्रतिभा पर्याप्त नहीं होती।
बल्लेबाजों को परिस्थितियों के मुताबिक अपना game plan बदलना पड़ता है, गेंद को छोड़ने का धैर्य रखना पड़ता है और लंबे समय तक crease पर टिकने की क्षमता दिखानी पड़ती है। पाकिस्तान के बल्लेबाजों को अब यह दिखाने की जरूरत है कि वे सिर्फ अच्छे individual shots खेलने में सक्षम नहीं हैं, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों में टीम के लिए बड़ी और लंबी पारियां भी खेल सकते हैं।
वापसी
लॉर्ड्स की परिस्थितियों में इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों का सामना करना किसी भी बल्लेबाजी क्रम के लिए आसान नहीं होता। नई गेंद, seam movement और लगातार सही line-length पर गेंदबाजी पाकिस्तान के बल्लेबाजों के लिए बड़ी चुनौती रही। लेकिन टेस्ट क्रिकेट की असली परीक्षा भी ऐसे ही समय में होती है, जब परिस्थितियां बल्लेबाज के पक्ष में नहीं होतीं।
पाकिस्तान को अब माइकल वॉन की ‘सेकंड डिविजन क्रिकेट’ वाली टिप्पणी का जवाब मैदान पर देना होगा। इसके लिए उसे सिर्फ एक-दो अच्छी साझेदारियां नहीं, बल्कि पूरी टीम के स्तर पर ज्यादा disciplined batting दिखानी होगी। बाबर आजम और बाकी senior बल्लेबाजों से बड़ी पारियों की उम्मीद होगी, जबकि युवा खिलाड़ियों को भी दबाव में अपनी तकनीक और धैर्य दिखाना होगा। अगर पाकिस्तान आगे के मैचों में अपनी batting को मजबूत कर पाता है, तो वॉन की कठोर टिप्पणी को गलत साबित करने का इससे बेहतर जवाब कोई नहीं होगा।










