भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की गिनती आज दुनिया के सबसे खतरनाक गेंदबाजों में होती है। उनकी सटीक यॉर्कर, शानदार रफ्तार और मुश्किल परिस्थितियों में विकेट लेने की क्षमता ने उन्हें खास पहचान दिलाई है। लेकिन पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और दिग्गज तेज गेंदबाज वकार यूनिस का मानना है कि सीमित ओवरों के क्रिकेट में बुमराह का कोई मुकाबला नहीं है, जबकि टेस्ट क्रिकेट में उन्हें अभी और अपनी क्षमता साबित करनी बाकी है।
वकार यूनिस ने शुभंकर मिश्रा के पॉडकास्ट पर बातचीत के दौरान बुमराह की गेंदबाजी की जमकर तारीफ की। हालांकि, उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में बुमराह को दूसरे दिग्गज तेज गेंदबाजों से आगे रखने पर सवाल भी उठाए। उनके मुताबिक, टेस्ट प्रारूप में बुमराह ने दूसरे प्रमुख गेंदबाजों की तुलना में कम क्रिकेट खेला है, इसलिए उनकी तुलना करते समय मिचेल स्टार्क, जोश हेजलवुड और इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
वकार ने माना कि वनडे और टी20 क्रिकेट में बुमराह का प्रभाव अलग ही स्तर का है। जब मुकाबला मुश्किल हो, रन रोकने हों या किसी अहम बल्लेबाज का विकेट निकालना हो, तब बुमराह अक्सर कप्तान की पहली पसंद बन जाते हैं। यही वजह है कि वकार की नजर में छोटे प्रारूपों में बुमराह ऐसे गेंदबाज हैं, जो दबाव के समय अपनी टीम के लिए बड़ा अंतर पैदा कर सकते हैं।
टेस्ट में अभी परीक्षा बाकी
वकार यूनिस ने बुमराह के टेस्ट रिकॉर्ड को नजरअंदाज नहीं किया। बुमराह ने 52 टेस्ट मैचों में 234 विकेट हासिल किए हैं और उनका गेंदबाजी औसत 19.7 रहा है। यह आंकड़ा बताता है कि जब भी वह टेस्ट क्रिकेट में मैदान पर उतरते हैं, तो बल्लेबाजों के लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं। इसके बावजूद वकार का मानना है कि टेस्ट क्रिकेट में उनकी उपलब्धियों को दूसरे दिग्गज गेंदबाजों के साथ तुलना करते समय उनके मैचों की संख्या को भी ध्यान में रखना चाहिए।
वकार ने कहा कि मौजूदा दौर में सफेद गेंद से गेंदबाजी करने के मामले में बुमराह जैसी क्षमता वाला गेंदबाज मिलना मुश्किल है। लेकिन टेस्ट क्रिकेट की बात अलग है, क्योंकि इस प्रारूप में गेंदबाज को लंबे स्पेल करने पड़ते हैं और पांच दिन तक लगातार अच्छा प्रदर्शन बनाए रखना होता है। उनके अनुसार, मिचेल स्टार्क और जोश हेजलवुड जैसे गेंदबाजों के पास टेस्ट क्रिकेट का काफी अनुभव है। इंग्लैंड के कुछ प्रमुख तेज गेंदबाजों को भी इस चर्चा में शामिल करना जरूरी है।
यह बयान ऐसे समय में आया है, जब बुमराह टेस्ट क्रिकेट में भी कई शानदार उपलब्धियां हासिल कर चुके हैं। हालांकि, चोटों और कार्यभार को नियंत्रित करने की जरूरत के कारण वह लगातार सभी मुकाबलों में नहीं खेल पाते। उनकी यही सीमित उपलब्धता टेस्ट प्रारूप में उनके कुल मैचों की संख्या को प्रभावित करती रही है।
बुमराह के रिकॉर्ड शानदार
जसप्रीत बुमराह ने टेस्ट क्रिकेट में अपने शुरुआती दिनों से ही खास छाप छोड़ी थी। साल 2018 में उन्होंने अपने 11वें टेस्ट मैच में 50 विकेट पूरे किए और भारत के लिए इस मुकाम तक पहुंचने वाले सबसे तेज तेज गेंदबाज बने। इसके बाद उन्होंने अपने 24वें टेस्ट में 100 विकेट पूरे कर लिए। इतनी तेजी से विकेट हासिल करना बताता है कि बुमराह ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कितनी जल्दी अपनी जगह मजबूत कर ली थी।
साल 2019 में बुमराह ने टेस्ट क्रिकेट में हैट्रिक लेकर एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम की। वह टेस्ट मैच में हैट्रिक लेने वाले तीसरे भारतीय गेंदबाज बने। उनकी गेंदबाजी की खासियत यह रही है कि वह सिर्फ एक ही तरह की पिच या परिस्थितियों पर निर्भर नहीं रहते। सही लाइन-लेंथ, गेंद की सीम पोजिशन और अचानक गति में बदलाव के जरिए वह अलग-अलग हालात में विकेट निकालने की क्षमता रखते हैं।
साल 2024 में उनके प्रदर्शन को आईसीसी ने भी सम्मान दिया और उन्हें वर्ष का सर्वश्रेष्ठ पुरुष टेस्ट क्रिकेटर चुना गया। इसके बाद 2024-25 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में भी उन्होंने शानदार गेंदबाजी की। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की सीरीज में बुमराह ने 32 विकेट हासिल किए। यह उस सीरीज में किसी भी गेंदबाज का सबसे बड़ा विकेट आंकड़ा था और उनके प्रभाव को दिखाने के लिए काफी है।
इंग्लैंड में भी बुमराह का कमाल
बुमराह की सफलता सिर्फ भारतीय परिस्थितियों तक सीमित नहीं रही है। इंग्लैंड में भी उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया है। वहां खेले 11 टेस्ट मैचों में वह 51 विकेट ले चुके हैं। इंग्लैंड की परिस्थितियों में तेज गेंदबाजों को स्विंग और सीम मूवमेंट का फायदा मिल सकता है, लेकिन वहां लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के लिए नियंत्रण और धैर्य भी जरूरी होता है।
बुमराह ने अपनी गेंदबाजी से यह साबित किया है कि वह अलग-अलग परिस्थितियों में खुद को ढाल सकते हैं। उनकी गति, सटीकता और गेंद को दोनों तरफ मूव कराने की क्षमता उन्हें खास बनाती है। हालांकि, चोटों के कारण उन्हें कई बार क्रिकेट से दूर रहना पड़ा है। इसी वजह से उनके कार्यभार को सावधानी से संभालना भारतीय टीम के लिए जरूरी हो गया है।
बुमराह ने इस साल अब तक भारत के लिए कोई टेस्ट मैच नहीं खेला है। अब उम्मीद की जा रही है कि वह अगले महीने न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली दो टेस्ट मैचों की सीरीज में वापसी कर सकते हैं। यह सीरीज भारत के लिए काफी अहम होगी, क्योंकि विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में जगह बनाने की दौड़ में परिणाम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
न्यूयॉर्क की यादगार गेंदबाजी
वकार यूनिस ने टेस्ट क्रिकेट में बुमराह की उपलब्धियों पर सवाल जरूर उठाए, लेकिन वनडे और टी20 प्रारूप में उनके प्रभाव की तारीफ करने में कोई कमी नहीं छोड़ी। उन्होंने खास तौर पर 2024 टी20 विश्व कप में भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए मुकाबले को याद किया। न्यूयॉर्क में खेले गए उस मैच में बुमराह की गेंदबाजी ने भारत को बेहद मुश्किल परिस्थिति से बाहर निकलने में मदद की थी।
भारत ने उस मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 119 रन बनाए थे। इतने छोटे लक्ष्य का बचाव करना आसान नहीं था, खासकर तब जब पाकिस्तान की टीम लक्ष्य के करीब पहुंचती दिखाई दे रही थी। 14 ओवर के बाद पाकिस्तान का स्कोर तीन विकेट पर 80 रन था और उसे आखिरी छह ओवरों में जीत के लिए सिर्फ 40 रन चाहिए थे। उस समय पाकिस्तान की स्थिति मजबूत मानी जा रही थी।
लेकिन बुमराह ने मोहम्मद रिजवान को आउट करके मैच का रुख बदल दिया। रिजवान का विकेट पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका साबित हुआ और इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने दबाव बनाए रखा। पाकिस्तान की बल्लेबाजी लड़खड़ा गई और भारत ने छह रन से यादगार जीत हासिल कर ली।
वकार ने माना कि उस मुकाबले में पाकिस्तान के पास जीत हासिल करने का अच्छा मौका था। रन बनाने की जरूरत नियंत्रण में थी और टीम लक्ष्य के करीब पहुंच चुकी थी। लेकिन बुमराह के उस ओवर ने पूरी तस्वीर बदल दी। वकार के मुताबिक, यही वह अंतर है जो बड़े खिलाड़ियों को बाकी खिलाड़ियों से अलग करता है।
दबाव में बुमराह का जवाब नहीं
वकार यूनिस ने कहा कि जब भारतीय कप्तान किसी मुश्किल स्थिति में होते हैं, तो वह अक्सर गेंद बुमराह को सौंपते हैं। इसकी वजह है कि बुमराह दबाव में भी अपनी योजना पर टिके रहते हैं और टीम को विकेट दिलाने की क्षमता रखते हैं। पाकिस्तान के खिलाफ टी20 विश्व कप का मुकाबला इसका बड़ा उदाहरण था, जहां भारत ने कम स्कोर बनाने के बावजूद जीत हासिल की।
वकार का मानना है कि बड़े मुकाबलों में ऐसे खिलाड़ी बेहद अहम होते हैं, जो मुश्किल समय में अपनी टीम के लिए निर्णायक प्रदर्शन कर सकें। जब कोई प्रमुख खिलाड़ी दबाव में अच्छा प्रदर्शन करता है, तो इससे टीम के दूसरे खिलाड़ियों का आत्मविश्वास भी बढ़ता है। वे भी बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित होते हैं और मुकाबले में वापसी की उम्मीद मजबूत होती है।
बुमराह की सबसे बड़ी ताकत यही है कि वह सिर्फ शुरुआती ओवरों में ही नहीं, बल्कि पारी के आखिरी हिस्से में भी प्रभावी साबित होते हैं। टी20 क्रिकेट में जब बल्लेबाज तेजी से रन बनाने की कोशिश करते हैं, तब उनकी यॉर्कर और धीमी गेंदें काफी काम आती हैं। वनडे क्रिकेट में भी वह अहम समय पर विकेट निकालने और रन गति पर नियंत्रण रखने की क्षमता रखते हैं।
वकार यूनिस का करियर भी शानदार रहा है। पाकिस्तान के लिए टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 373 विकेट हासिल किए थे और दुनिया के बेहतरीन तेज गेंदबाजों में अपनी जगह बनाई थी। इसलिए बुमराह के प्रदर्शन पर उनकी राय को खास महत्व दिया जाता है। हालांकि, उनकी टिप्पणी को बुमराह की उपलब्धियों को कम आंकने के बजाय टेस्ट क्रिकेट में अनुभव और निरंतरता को लेकर उनकी सोच के रूप में भी देखा जा सकता है।
बुमराह की अगली चुनौती
जसप्रीत बुमराह के सामने अब सबसे अहम चुनौती अपनी फिटनेस बनाए रखते हुए तीनों प्रारूपों में सही संतुलन कायम करना है। सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनका प्रभाव पहले ही साबित हो चुका है, जबकि टेस्ट क्रिकेट में भी उनके आंकड़े काफी प्रभावशाली हैं। लेकिन चोटों के कारण लगातार नहीं खेल पाने की समस्या को देखते हुए टीम प्रबंधन को उनके कार्यभार की योजना सावधानी से बनानी होगी।
न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी टेस्ट सीरीज बुमराह के लिए अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का अच्छा मौका हो सकती है। विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल की दौड़ के बीच भारत को उनके अनुभव और विकेट लेने की क्षमता की जरूरत पड़ सकती है। अगर वह फिट होकर वापसी करते हैं, तो भारतीय गेंदबाजी आक्रमण को बड़ी मजबूती मिलेगी।
वकार यूनिस की टिप्पणी ने बुमराह को लेकर एक नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है। वनडे और टी20 में उनके प्रभाव पर सवाल नहीं हैं, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उनकी उपलब्धियों को दूसरे दिग्गज गेंदबाजों के साथ किस तरह रखा जाए, इस पर अलग-अलग राय हो सकती है। आखिरकार, बुमराह के पास अपने प्रदर्शन से हर सवाल का जवाब देने का मौका है। उनकी अब तक की उपलब्धियां शानदार हैं और आने वाले टेस्ट मुकाबले उनके रिकॉर्ड को और मजबूत करने का अवसर दे सकते हैं।










