बांग्लादेश से हार के बाद ऑस्ट्रेलिया में बदलाव की मांग, मैकडॉनल्ड ने दिया बड़ा बयान

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McDonald

बांग्लादेश के खिलाफ डार्विन टेस्ट में मिली नौ विकेट की हार ने ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट की कमजोरियों को सामने ला दिया है। हार के बाद टीम में बड़े बदलाव की मांग शुरू हो गई है, लेकिन मुख्य कोच एंड्रयू मैकडॉनल्ड इस समय जल्दबाजी में कोई फैसला लेने के पक्ष में नहीं हैं।

ऑस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी परेशानी उसकी बल्लेबाजी रही। पहली पारी में टीम सिर्फ 198 रन पर सिमट गई और दूसरी पारी में 284 रन ही बना सकी। इसके मुकाबले बांग्लादेश ने पहली पारी में 426 रन बनाकर 228 रन की बढ़त हासिल की और फिर 57 रन का लक्ष्य आसानी से हासिल कर लिया।

हार

मैकडॉनल्ड ने माना कि ऑस्ट्रेलिया ने डार्विन में अपने स्तर के मुताबिक प्रदर्शन नहीं किया। उनके अनुसार दो पारियों में 500 से कम रन बनाना उस पिच पर पर्याप्त नहीं था।

हालांकि, कोच का मानना है कि एक खराब टेस्ट के बाद पूरी टीम की संरचना बदलना सही तरीका नहीं होगा। ऑस्ट्रेलिया के सामने छह दिन बाद ही मैके में दूसरा टेस्ट है और टीम को तुरंत अपनी रणनीति पर काम करना होगा।

बदलाव

पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग समेत कुछ पूर्व खिलाड़ियों ने टीम में बदलाव की जरूरत बताई है। खास तौर पर जेक वेदराल्ड और मार्नस लाबुशेन की जगह को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

वेदराल्ड ने अब तक 11 टेस्ट पारियों में सिर्फ एक बार 50 से ज्यादा रन बनाए हैं। वहीं लाबुशेन भी लंबे समय से बड़ी पारी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बांग्लादेश के खिलाफ उन्होंने पहली पारी में एक रन और दूसरी पारी में 31 रन बनाए।

इसके बावजूद मैकडॉनल्ड का मानना है कि दोनों खिलाड़ियों को तुरंत बाहर करने का फैसला सिर्फ एक टेस्ट की हार के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। ऑस्ट्रेलिया को यह भी देखना होगा कि उनकी जगह लेने वाला खिलाड़ी वास्तव में टीम को बेहतर विकल्प देता है या नहीं।

विकल्प

अगर ऑस्ट्रेलिया बदलाव करता है तो उसके पास कुछ विकल्प जरूर मौजूद हैं। जोश इंग्लिस ने अभ्यास मैच में इंग्लैंड लायंस के खिलाफ ओपनिंग करते हुए 40 और नाबाद 125 रन बनाए थे। इससे वह शीर्ष क्रम के लिए एक संभावित विकल्प बनते हैं।

मैथ्यू रेनशॉ भी चयनकर्ताओं की नजर में हो सकते हैं। उन्होंने पिछले शेफील्ड शील्ड सत्र में 10 पारियों में तीन शतक लगाए थे। हालांकि, उससे पहले के दो घरेलू प्रथम श्रेणी सत्रों में उनका औसत 30 से नीचे रहा था।

युवा खिलाड़ियों में कूपर कॉनॉली का नाम भी चर्चा में है। 22 वर्षीय बल्लेबाज का प्रथम श्रेणी औसत 44.63 है, लेकिन उन्होंने अभी तक ऊपरी क्रम में ज्यादा क्रिकेट नहीं खेला है। इसलिए उन्हें सीधे टेस्ट टीम में उतारना बड़ा फैसला होगा।

युवा

सैम कोंस्टास ऑस्ट्रेलिया के भविष्य के प्रमुख बल्लेबाजों में गिने जाते हैं। 20 वर्षीय ओपनर पिछले साल वेस्टइंडीज के खिलाफ पांच टेस्ट खेल चुके हैं।

हालांकि, पिछले शेफील्ड शील्ड सीजन में उनका औसत 33 रहा था। ऐसे में उन्हें तुरंत टेस्ट टीम में वापस लाने के लिए चयनकर्ताओं को काफी सोच-विचार करना पड़ सकता है।

कैंपबेल केलीवे और ओली पीक जैसे युवा खिलाड़ी भी भविष्य के विकल्प हैं। पीक ऑस्ट्रेलिया के लिए वनडे डेब्यू कर चुके हैं, लेकिन टेस्ट स्तर पर उन्हें अभी और अनुभव की जरूरत हो सकती है।

यही वजह है कि ऑस्ट्रेलिया के लिए बदलाव आसान नहीं है। टीम में कुछ अनुभवी बल्लेबाज फॉर्म से जूझ रहे हैं, लेकिन घरेलू क्रिकेट में ऐसे विकल्पों की संख्या बहुत ज्यादा नहीं है जो तुरंत अंतरराष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी संभाल सकें।

गेंदबाजी

गेंदबाजी में ऑस्ट्रेलिया की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत है। पैट कमिंस, जोश हेजलवुड, मिशेल स्टार्क और नाथन लियोन जैसे अनुभवी खिलाड़ी टीम को काफी मजबूती देते हैं।

स्कॉट बोलैंड भी एक विकल्प हैं और परिस्थितियों के हिसाब से उन्हें मौका मिल सकता है। लेकिन मैकडॉनल्ड ने संकेत दिया है कि गेंदबाजी में भी बदलाव सिर्फ हार के कारण नहीं होगा।

टीम प्रबंधन खिलाड़ियों की फिटनेस, पिच की परिस्थितियों और पूरे संयोजन को ध्यान में रखकर फैसला करेगा। इसका मतलब है कि मैके टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया की प्लेइंग इलेवन में बदलाव संभव है, लेकिन किसी खिलाड़ी को सिर्फ दबाव के कारण बाहर करना तय नहीं है।

लाबुशेन

मार्नस लाबुशेन की फॉर्म ऑस्ट्रेलिया के लिए सबसे बड़ी चिंताओं में से एक है। 64 टेस्ट का अनुभव रखने वाले इस बल्लेबाज से टीम को लगातार बड़ी पारियों की उम्मीद रहती है।

बांग्लादेश के खिलाफ उनके 1 और 31 रन टीम की जरूरत के हिसाब से काफी नहीं थे। हालांकि, मैकडॉनल्ड ने बताया कि लाबुशेन ने अपनी तकनीक में कुछ बदलाव किए हैं और दबाव में उन्हें लागू करने की कोशिश कर रहे हैं।

अब असली सवाल यह है कि वह इन बदलावों को बड़ी पारी में कब बदल पाएंगे। अगर उनका खराब दौर आगे भी जारी रहता है, तो चयनकर्ताओं के सामने विकल्पों पर विचार करने का दबाव बढ़ सकता है।

आगे

ऑस्ट्रेलिया के सामने अगले 12 महीनों में करीब 21 टेस्ट का व्यस्त कार्यक्रम है। ऐसे लंबे शेड्यूल में टीम को अनुभवी खिलाड़ियों के साथ युवा प्रतिभाओं को भी तैयार करना होगा।

बांग्लादेश के खिलाफ दूसरा टेस्ट 22 से 26 अगस्त तक मैके में खेला जाएगा। यह मुकाबला ऑस्ट्रेलिया के लिए सिर्फ सीरीज बचाने का मौका नहीं होगा, बल्कि यह भी दिखाएगा कि टीम डार्विन की हार से कितना सीख पाई है।

मैकडॉनल्ड का संदेश फिलहाल साफ है। ऑस्ट्रेलिया बदलाव से पीछे नहीं हटेगा, लेकिन बदलाव सिर्फ एक हार की प्रतिक्रिया में नहीं किया जाएगा। टीम को सही खिलाड़ी, सही संयोजन और सही समय के आधार पर फैसले लेने होंगे।

डार्विन में बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया की बल्लेबाजी की कमियों को उजागर कर दिया है। अब मैके टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के पास मैदान पर जवाब देने का मौका है। अगर अनुभवी खिलाड़ी वापसी करते हैं तो बदलाव की चर्चा कुछ समय के लिए शांत हो सकती है, लेकिन अगर वही समस्याएं दोबारा सामने आती हैं, तो युवा खिलाड़ियों को मौका देने की मांग और तेज होना तय है।

FAQs

ऑस्ट्रेलिया बांग्लादेश से क्यों हारा?

कमजोर बल्लेबाजी और बांग्लादेश की शानदार गेंदबाजी मुख्य कारण रहे।

क्या ऑस्ट्रेलिया टीम में बदलाव करेगा?

बदलाव संभव है, लेकिन मैकडॉनल्ड ने जल्दबाजी से इनकार किया है।

लाबुशेन की फॉर्म कैसी है?

लाबुशेन लंबे समय से बड़ी टेस्ट पारी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

दूसरा टेस्ट कब होगा?

दूसरा टेस्ट 22 से 26 अगस्त तक मैके में खेला जाएगा।

ऑस्ट्रेलिया के युवा विकल्प कौन हैं?

कूपर कॉनॉली, सैम कोंस्टास और ओली पीक प्रमुख विकल्प हैं।

Ehtesham Arif

I’m Ehtesham Arif, lead cricket analyst at Kricket Wala with over 3 years of experience in cricket journalism. I’m passionate about bringing you reliable match analysis and the latest updates from the world of cricket. My favorite team is India, and in the IPL, I support Delhi Capitals.

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